संवाद न्यूज एजेंसी
रादौर। ई-टेंडरिंग और राइट टू रिकॉल के विरोध में ब्लॉक सरपंच एसोसिएशन की ओर से चलाया जा रहा अनिश्चितकालीन आंदोलन मंगलवार को भी जारी रहा। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि सरपंचों को 20 से 30 लाख रुपये तक के काम कराने के अधिकार मिले। साथ ही राइट टू रिकॉल को पहले विधायकों और सांसदों पर लागू किया जाए। बीडीपीओ कार्यालय में चल रहे सरपंचों के आंदोलन को समर्थन देने हल्का रादौर विधायक डॉ. बीएल सैनी भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी हर आंदोलन में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। सरपंचों का जो भी आंदोलन होगा, कांग्रेस पार्टी का हर कार्यकर्ता उनके साथ होगा।
उन्होंने सरकार से मांग की है कि सरकार सरपंचों की मांगों और समस्याओं को पूरा करे। सरकार को चाहिए कि सरपंचों को दो लाख रुपये के विकास कार्यों की बजाय, 20 से 30 लाख रुपये के विकास कार्यों को कराये जाने का प्रावधान करे। ब्लॉक सरपंच एसोसिएशन प्रधान पम्मी खेड़की के नेतृत्व में सरपंचों ने सरकार व प्रशासन के विरुद्ध नारेबाजी कर रोष प्रकट किया। इस अवसर पर ब्लॉक सरपंच एसोसिएशन प्रधान पम्मी खेड़की ने बताया कि उनका अपनी मांगों को लेकर प्रदेशभर में सरकार विरोधी धरना प्रदर्शन चल रहा है। जब तक सरकार उनकी मांगे पूरी नहीं करेगी, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि ई-टेंडरिंग के माध्यम से सरकार पंचायती राज को खत्म करना चाहती है। दो लाख रुपये में गांव में कोई भी विकास कार्य नहीं हो सकते। वहीं राइट टू रिकॉल का विरोध करते हुए कहा कि रिकॉल को पहले विधायकों व सांसदों पर लागू करना चाहिए। इस अवसर पर भाकियू जिला प्रधान संजू गुंदयाना, सतीश कुमार घिलौर, परमजीत सिंह बापा, छत्तरपाल सिंह झगुडी, बलवान सिंह बैंडी, जोनी कुमार हिरनछप्पर, मांगेराम कंडरौली, सुभाष सैनी खुर्दबन, रोहित बापौली, उधम सिंह रादौरी आदि मौजूद रहे।