सरकारी कार्यों में लेटलतीफी कोई नई बात नहीं है। एक तरफ जहां नगर निगम
ठेकेदारों की मनमानी से जूझ रहा है, वहीं अन्य विभाग भी इससे अछूते नहीं
हैं।
पीडब्लूडी की ओर से पंचायत भवन के पीछे बनाए जा रहे सैनिक रेस्ट हाउस
का काम अभी भी पूरा नहीं हो पाया है, जबकि इस रेस्ट हाउस का कार्य 31
दिसंबर को पूरा हो जाना चाहिए था। लेकिन अभी भी रेस्ट हाउस का काफी कार्य
अधूरा पड़ा है। पिछले माह एडीसी की अध्यक्षता में हुई पूर्व सैनिकों की
बैठक में भी यह मुद्दा गूंजा था।
पूर्व सैनिकों ने जल्द से जल्द रेस्ट हाउस
का काम पूरा करने की मांग रखी थी। जिसमें अधिकारियों ने आश्वासन दिया था
कि 31 दिसंबर तक कार्य पूरा हो जाएगा। लेकिन अब वे ही अधिकारी बजट न होने
की वजह से कार्य समय पर न होने की बात कह रहे हैं। बैठक में एडीसी ने भी
बड़ी गर्मजोशी दिखाते हुए कार्य जल्द पूरा करने के निर्देश दिए थे। लेकिन
समय पर बजट ही जारी नहीं हो पाया जिससे काम तय तारीख तक पूरा नहीं हो सका।
इस रेस्ट हाउस पर एक करोड़ 25 लाख रुपये खर्च होने हैं।
ये काम हैं अधूरा
रेस्ट
हाउस में काफी काम अधूरा है। इसमें अभी पूरी बिल्डिंग पर वाइटवॉश का कार्य
हो पाया है, ज्यादातर खिड़कियां और दरवाजे भी अभी नहीं लग पाए हैं,
बिल्डिंग में बिजली का काम भी नहीं हो पाया है। इसके साथ ही रेस्ट हाउस का
मुख्य रास्ता भी नहीं बन पाया है और बाउंडरी भी नहीं हो पाई है। बताया जा
रहा है जो राशि जारी की गई है उसमें चहारदीवारी नहीं बनाई जाएगी। इसके लिए
अलग से बजट आना है, जो अभी तक जारी नहीं हो पाया है। इसके साथ ही जो रेस्ट
हाउस में फूलों के पौधे और अन्य सजावट के लिए जो भी पौधे लगाए जाने हैं
उनके लिए भी बजट जारी नहीं हो पाया है। जिससे बागवानी विभाग की ओर से कार्य
शुरू नहीं हो पाया है। इसके साथ ही बिल्डिंग के बार पड़ी खाली जगह को एक
समान करने के लिए मिट्टी डाली जानी है। अन्य कई छोटे-छोटे काम बिल्डिंग में
अधूरे पड़े हैं। मौके पर काम कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि अभी कम से
कम डेढ़ से दो माह का समय और लग जाएगा।
मजदूरों ने रोया दुखड़ा
रेस्ट
हाउस में वाइटवॉश का कार्य कर रहे मजदूरों ने बताया कि उन्हें भी मजदूरी
के हिसाब से पैसे नहीं दिए जा रहे हैं। उनका कहना है कि ठेकेदार की ओर से
उन्हें वाइटवॉश का सामान भी पूरा नहीं दिया जा गया है। इससे वे रेगुलर काम
नहीं कर पा रहे हैं। उनका कहना है कि समय पर मजदूरी न मिलने से उनके सामने
दो वक्त की रोटी की समस्या आ गई है। ठंड के दिनों में उन्हें भूखे पेट सोना
पड़ रहा है। यहां से काम छोड़कर अब कहीं अन्य स्थान पर मजदूरी भी नहीं कर
पा रहे हैं। उनका कहना है जब ठेकेदार से पैसे मांगे जाते हैं तो उनकी ओर से
पेमेंट न आने की बात सुना दी जाती है।
इसलिए बनाया जा रहा रेस्ट हाउस
पूर्व
सैनिकों की मांग पर यह रेस्ट हाउस मनाया जा रहा है। इससे पूर्व सैनिकों के
साथ-साथ मौजूदा सैनिकों को भी फायदा होगा। क्योंकि अभी जिले में कोई भी
रेस्ट हाउस नहीं है। यमुनानगर की सीमा यूपी और उत्तराखंड से जुड़ी है। इसके
लिए इन राज्यों से आने वाले सैनिकों या पूर्व सैनिकों को यमुनानगर में कुछ
घंटे या रात के समय स्टे करने पड़ जाए तो उनके लिए कोई प्रबंध नहीं है।
इसी को लेकर ही यह रेस्ट हाउस बनाया जा रहा है, ताकि अगर किसी सैनिक को
रुकना पड़े तो वह यहां पर आराम कर सकता है।