संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। तीर्थराज श्री कपालमोचन के सूरजकुंड सरोवर समीप लगे कदंब व बेरी के पेड़ों की आस्था की जड़े कई प्रदेशों तक फैली हैं, क्योंकि मान्यता है कि कार्तिक मास में इन पेड़ों पर सूत बांधने से विवाह व संतान सुख मिलता है।
यही वजह है कि श्रीकपाल मोचन मेले में पंजाब व अन्य प्रदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं में कदंब व बेरी के पेड़ पर सूत बांधना नहीं भूलते जबकि, पिछले कई दशक से मेले के दौरान बेरी से बेर तोड़ने के लिए भी होड़ रहने लगी है, इसे भी श्रद्धालु संतान प्राप्ति का प्रसाद बताने लगे हैं। कमाल मोचन के सूरजकुंड सरोवर के एक छोर पर कदंब तो दूसरे छोर पर बेरी का पेड़ है।
इनमें कदंब के पेड़ को महाभारत कालीन बताया जाता है। ऐसी मान्यता है कि यहीं माता कुंती ने तपस्या की और भगवान सूर्य से कर्ण की प्राप्ति की और तभी से सरोवर का नाम सूरजकुंड है। इसी मान्यता के चलते सरोवर किनारे कदंब के पेड़ पर कार्तिक मास में सूत बांध विवाहिताएं संतान प्राप्ति की मन्नतें मांगती हैं फिर मन्नत पूरी होने पर सूत खोल जाती हैं।
अन्य मान्यता अनुसार कदंब के पेड़ पर भगवान श्रीकृष्ण बाल्यकाल में लीलाएं करते थे और वे कार्तिक पूर्णिमा के मेले के दौरान पेड़ पर अदृश्य रूप में आकर श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। हैं। इसी मान्यता के चलते अविवाहित युवक-युवतियां मेले के दौरान कदंब के पेड़ पर सूत बांध शीघ्र विवाह की मनोकामना करते हैं।
यहीं मनोकामनाएं सूरजकुंड सरोवर के दूसरे छोर पर बेरी के पेड़ पर सूत बांधने से भी पूरी होने की मान्यता है। यही कारण है कि कार्तिक पूर्णिमा के मेले में सूरजकुंड सरोवर के चारों ओर सूत की 50 से ज्यादा दुकानें लगती हैं। मेले में दोनों पेड़ों की परिक्रमा कर सूत बांधने वाले श्रद्धालुओं की संख्या कम नहीं होती। खासकर एकादशी पर दोनों पेड़ों पर सूत बांधने की अधिक होड़ रहती है।