संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। ईएसआई अस्पताल के नजदीक फास्ट फूड की लगी रेहड़ियों व चिकन की दुकानों के कारण सड़क पर हर समय जाम लगा रहता है। हर रोज लगने वाले जाम से वाहन चालक परेशान हो गए हैं। यहां लगे जाम से निकलना इतना आसान नहीं है। इनकी वजह से केवल जाम ही नहीं लग रहा बल्कि हादसे भी हो रहे हैं।
दुकानों पर चिकन लेने के लिए आने वाले वाले लोग सड़क पर ही अपनी कारों को खड़ी करके चले जाते हैं। जिससे सड़क जाम रहती है। ट्रैफिक पुलिस ने इन पर कार्रवाई करने से अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। वहीं नगर निगम कार्रवाई करने से बच रहा है। इसका खामियाजा लोग भुगत रहे हैं।
इन रेहड़ियों पर लोगों की जरूरत का समान तो मिलता है, लेकिन यदि इन रेहड़ियों के लिए स्ट्रीट वेडिंग पॉलिसी बनाकर भी कोई फायदा नहीं हुआ। शहर से यदि रेहड़ी फडी वालों को वेंडिंग जोन में शिफ्ट किया जाए तो हादसे व जाम की स्थिति कम हो सकती है। लोगों की शिकायत के बाद भले ही नगर नगर निगम एक दो दिन अभियान चलाकर रेहड़ियों को हटा देती है पर कुछ दिनों बाद वही रेहड़ियां फिर लगने लगती हैं।
शहर की आबादी लगभग साढ़े चार लाख हो गई है और छोटे से शहर में जाम लगना स्वाभाविक सी बात होती है। लेकिन सड़क किनारे लगने वाली रेहड़ी-फड़ी इस जाम को दोगुना कर देती हैं। शहर के तेजली रोड पर भी यहीं हाल है, क्योंकि यहां पर कार डेकोरेशन का काम होता है और सड़क पर ही वाहनों को लगा कर काम किया जा रहा है। जिस कारण हर दिन कोई न कोई हादसा व गाली गलोच का मामला सामने आता है।
अग्रसेन चौक से लेकर रेलवे स्टेशन तक यही हाल बना हुआ है। हालांकि नगर निगम ने फ्रूट की रेहड़ियों को तो शिफ्ट कर दिया है जिससे शहरवासी खुश भी हैं। यदि अन्य रेहड़ियों को भी शिफ्ट की जाए तो शहर से जाम जैसी स्थिति को कम जरूर किया जा सकता है। शहर में लगने वाली रेहड़ी वालों का कहना है कि जिनकी दुकानों के सामने वो रेहड़ी लगाते हैं वह प्रतिदिन के हिसाब से 100, 200, 300 और 400 रुपये सुविधा शुल्क लेते हैं। फिर नगर निगम वाले भी पर्ची काट देते हैं।
रेहड़ी हटाना निगम का काम : ट्रैफिक इंचार्ज
यमुनानगर के ट्रैफिक इंचार्ज रामपाल ने बताया कि ट्रैफिक पुलिस तो अपना काम कर रही है पर वह रेहडियों को हटा नहीं सकते। यह काम नगर निगम का है। अगर ट्रैफिक पुलिस इन रेहड़ियों वालों को हटने को कहते हैं तो वह नगर निगम की पर्ची दिखा देते हैं।