हादसे में बेटे को खोने के बाद विपाल करती घायल सत्या देवी।
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रिश्तेदार की रस्म क्रिया से लौट रहे बाइक सवार मां-बेटे को तेज रफ्तार ट्रक चालक ने रौंद दिया। हादसा सहारनपुर-कुरुक्षेत्र स्टेट हाईवे पर रादौर आनाज मंडी के पास दोपहर को हुआ। टक्कर से मां सड़क से दूर जा गिरी, जबकि बेटा ट्रक के नीचे आ गया। मां की आंखों के सामने ही ट्रक बेटे को रौंदता हुआ काफी दूर तक ले गया, बेटी की जिंदगी के लिए मां चीखती हुई रह गई। हादसे के बाद चालक ट्रक सहित फरार हो गया। इस दौरान राहगीरों ने उसका पीछा कर उसे गांव कांजनू के पास पकड़ लिया। जिसके बाद लोगों ने ट्रक चालक की पिटाई कर दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। लोगों ने ट्रक चालकों को पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया। पुलिस ने ट्रक चालक पर केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार बिलासपुर के गांव मोहड़ी निवासी 33 वर्षीय विक्रम अपनी 62 वर्षीय मां सत्या देवी के साथ करनाल के गांव बपदा में अपने रिश्तेदार की रस्म क्रिया में गया था। रस्म क्रिया से मां बेटा बाइक से घर लौट रहा था। दोपहर सवा तीन घर लौटते समय जब वे रादौर अनाज मंड़ी के पास पहुंचे तो पीछे से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने ओवरटेक करते हुए उनकी बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर लगते ही बुजुर्ग सत्या देवी सड़क से दूर जा गिरी, जबकि विक्रम सड़क पर गिर गया। इस दौरान भागने की फिराक में चालक विक्रम को कुचलता हुआ निकल गया। हादसे की आवाज सुनते ही लोग उस ओर दौड़े। इस दौरान कुछ लोगों ने भाग रहे ट्रक चालक का पीछा किया। लोगों ने चालक को गांव कांजनू के पास पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने चालक पर केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
विक्रम को सौ मीटर तक घसीटते ले गया ट्रक
टक्कर के बाद चालक ने विक्रम को कुचल दिया। ट्रक का पहिया विक्रम के सिर के ऊपर से गुजर गया। हादसे के बाद चालक ने ट्रक दौड़ा लिया। इस दौरान विक्रम का शव पहिए में उलछा रहा। चालक शव को करीब सौ मीटर तक घसीटता हुआ ले गया। काफी दूर तक मांस के चिथड़े व खून बिखर गया। इस दौरान लोग शोर मचाते रहे। लेकिन चालक नहीं रुका। इसके बाद लोगों ने चालक का पीछा कर उसे पकड़ लिया।
जवान बेटे की दर्दनाक मौत देख फूट पड़ी मां की आंखें
मां के सामने ही जवान बेटे की मौत हो गई और मां चाह कर भी कुछ नहीं कर पाई। इससे दर्दनाक मंजर किसी मां के लिए क्या हो सकता है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जैसे ही विक्रम का सिर पहिए के नीचे आया तो सत्यादेवी की मुंह से बेहद करुण चितकार निकली और वह वहीं बेसुध हो गई। इस दौरान सत्यादेवी को अपनी चोटों का कोई अहसास नहीं था। मां बार बार पुलिस को उसके बेटे को न ले जाने की दुहाई दे रही थी। यह देखकर हर किसी का दिल पसीज गया। फिलहाल सत्या देवी का अस्पताल में इलाज चल रहा है।