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क्रांतिकारी अशफाक उल्ला खां का जन्मदिवस मनाया

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क्रांतिकारी अशफाक उल्ला खां को पुष्प अर्पित करते प्रधान वरयाम सिंह। संवाद - फोटो : Yamuna Nagar
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संवाद न्यूज एजेंसी
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जठलाना। इंकलाब मंदिर में शुक्रवार को महान क्रांतिकारी अशफाक उल्ला खां का जन्म दिवस मनाया गया। इंकलाब मंदिर की टीम ने क्रांतिकारी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
इंकलाब मंदिर संस्थापक एडवोकेट वरयाम सिंह बताया कि क्रांतिकारी अशफाक उल्ला खां का जन्म 22 अक्तूबर 1900 में उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर स्थित शहीदगढ़ में हुआ था। उनके पिता का नाम मोहम्मद शफीक उल्ला खान और उनकी मां का नाम मजहरे निशा बेगम था। वे पठान परिवार से ताल्लुक रखते थे और उनके परिवार में लगभग सभी सरकारी नौकरी में थे।
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बाल्यावस्था में अशफाक का मन पढ़ाई में नहीं लगता था। बल्कि उनकी रुचि तैराकी, घुड़सवारी, निशानेबाजी में अधिक थी। उन्हें कविताएं लिखने का काफी शौक था, जिसमें वे अपना उपनाम हसरत लिखा करते थे। देश में चल रहे आंदोलनों और क्रांतिकारी घटनाओं से प्रभावित अशफाक के मन में भी क्रांतिकारी भाव जागे।
उन्होंने ऐतिहासिक काकोरी कांड से राष्ट्र की संपत्ति बाहर न जाए को अंजाम दिया। वे ब्रिटिश पुलिस के हाथ नहीं आए। इसके बाद वे बनारस आ गए और इंजीनियरिंग कंपनी में काम शुरू किया। उन्होंने कमाए पैसे से क्रांतिकारियों की मदद भी की। अंग्रेज पुलिस को सूचना देकर अशफाक उल्ला खां को पकड़वा दिया गया। उनके पकड़े जाने के बाद जेल में उन्हें कई तरह की यातनाएं दी गई और सरकारी गवाह बनाने की भी कोशिश की गई।
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अशफाक ने इस प्रस्ताव को कभी मंजूर नहीं किया। आखिरकार 19 दिसंबर 1927 को अशफाक उल्ला खां को फैजाबाद जेल में फांसी दे दी गई। इस घटना ने आजादी की लड़ाई में हिंदू-मुस्लिम एकता को और भी अधिक मजबूत कर दिया। वीर क्रांतिकारी अशफाक उल्ला खां की शहादत को देश सदैव याद रखेगा। इस दौरान एडवोकेट सर्वजीत सिंह, गुरमुख सिंह, पंकज कुमार, मलकीत सिंह, गुरुनुर सिंह, दीपक गर्ग, विजय गर्ग, सोनू राम, अमित, कुलवंत सिंह, डॉ. सुभम, सुदेश कुमार, मोनू, प्रवीण आदि मौजूद रहे।
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