संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। गऊ संवर्धन न्यास की ओर से रविवार को 1966 में आज के ही दिन हुई गो-भक्तों की हत्या पर शोक जताया गया। इस दौरान न्यास सदस्यों ने गोवंशजों को चारा खिलाया और मारे गए गो-भक्तों को श्रद्धांजलि दी।
इस दौरान जिला संयोजक विवेक बोहता ने बताया कि सात नवंबर 1966 को दिल्ली में संसद के बाहर गोहत्या बंद करने की मांग कर रहे संत समाज के लोगों की हत्या कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद इसे नरसंहार कहा गया है। उन्होंने कहा कि गोहत्या बंद करवाने के लिए संत समाज के लोगों पर किए गए अत्याचार को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि तत्कालीन सरकार ने गो हत्या पर अंकुश लगाना अपनी जिम्मेदारी नहीं समझी थी।
संस्थापक रोहित चौधरी ने कहा कि सरकार अपना दायित्व निभाए और गोहत्या बंद कर वंशजों का संरक्षण करे। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में साजिश के तहत गोवंशजों की तस्करी कर हत्या की जा रही है। इससे देश का माहौल बिगाड़ने की साजिश से यह किया जा रहा है। रोहित चौधरी ने कहा कि भगवान राम के पूर्वज राजा दिलीप भी गोरक्षक थे और श्रीकृष्ण भी गोरक्षक थे। इतिहास में सैकड़ों महापुरुषों, संतों, राजाओं ने गौरक्षा की है, जो हमारे शौर्य को जगाता भी है।
हमें भी गोवंश की रक्षा करनी है। गाय भारतवर्ष की आत्मा व संस्कृति है, जिसकी हर कीमत पर रक्षा करनी चाहिए तब ही दुनिया सुरक्षित होगी। गांधी जी ने कहा था कि आजादी के बाद सबसे पहले गोहत्या बंद करवानी है। इस दौरान मराठा बस्ती में गाय का पूजन रक्षा सूत्र बांधा गया और चारा उपलब्ध करवाया गया। इस दौरान रोहित शर्मा, मनीष, कृष्णा सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।