यमुनानगर। नगर निगम की ओर से प्रॉपर्टी टैक्स की वसूली को लेकर की जा रही सख्ती के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। चालू वित्त वर्ष में अब तक नगर निगम 17 करोड़ रुपये से अधिक के प्रॉपर्टी टैक्स की रिकवरी कर चुका है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड मानी जा रही है। निगम अधिकारियों का अनुमान है कि यदि यही रफ्तार बनी रही तो 31 मार्च 2026 तक टैक्स रिकवरी का आंकड़ा 20 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। बीते वर्षों की तुलना में यह वृद्धि काफी अहम मानी जा रही है। गत वित्त वर्ष में नगर निगम ने कुल 15 करोड़ 98 लाख रुपये की प्रॉपर्टी टैक्स रिकवरी की थी, जबकि इस बार अभी वित्तीय वर्ष पूरा भी नहीं हुआ है और आंकड़ा पहले ही 17 करोड़ को पार कर चुका है। इससे साफ है कि निगम की रणनीति और सख्त कदमों का असर सीधे तौर पर टैक्स वसूली पर पड़ा है।
नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी क्षेत्र में कुल 216645 संपत्तियां हैं। निगम अधिकारियों ने इस बार विशेष रूप से उन संपत्ति मालिकों पर सख्ती की है, जिन पर एक लाख रुपये से अधिक का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया है। इनकी संख्या शहर में करीब 2900 है। ऐसे बकायेदारों को पहले नोटिस जारी किए गए, इसके बाद भी टैक्स जमा न कराने वालों की संपत्तियों को सील करने की कार्रवाई शुरू की गई। एक के बाद एक कई प्रॉपर्टी को सील करने की कार्रवाई से बड़े बकायेदारों में हड़कंप मच गया और कई लोगों ने तुरंत बकाया टैक्स जमा कराना शुरू कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि टैक्स वसूली को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। समय पर टैक्स नहीं चुकाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसी कारण इस वर्ष प्रॉपर्टी टैक्स की रिकवरी में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिल रही है।
विकास कार्यों को मिलेगी रफ्तार:
प्रॉपर्टी टैक्स से मिलने वाली आय नगर निगम के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अक्सर बजट की कमी के चलते शहर में विकास कार्य प्रभावित होते रहे हैं। सड़कों की मरम्मत, नालियों की सफाई, स्ट्रीट लाइट, पार्कों का सौंदर्यीकरण और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए पर्याप्त बजट नहीं मिल पाता। इस बार बढ़ी हुई टैक्स रिकवरी से नगर निगम को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अतिरिक्त राजस्व से विकास कार्यों को नई रफ्तार मिलेगी और आम जनता को इसका सीधा लाभ पहुंचेगा। शहर के विभिन्न इलाकों में लंबित परियोजनाओं को पूरा करने में अब आसानी होगी।
वर्जन:
शहर में जिन लोगों पर प्रॉपर्टी टैक्स बकाया है उन पर किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जा रही। जो टैक्स नहीं देगा उसकी संपत्ति को सील किया जा रहा है। इसलिए टैक्स में पिछले साल से ज्यादा रिकवरी हुई है। हमारा प्रयास 31 मार्च तक 20 करोड़ रुपये से अधिक टैक्स रिकवरी का लक्ष्य रखा गया है।
- अजय वालिया, जेडटीओ, नगर निगम।