संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले में दो दिन से हो रही बारिश ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। मंडियों में बेचने के लिए लाया गया धान बारिश में भीग गया। फड़ और सड़कों पर पड़ी धान की ढेरियों को बारिश से बचाने के लिए तिरपाल से ढका गया, लेकिन तिरपाल के नीचे से पानी ढेरियों के नीचे तक पहुंच गया। इससे धान भीग गया।
पहले ही मंडियों में अधिक नमी वाला धान पहुंच रहा है। ऐसे में लगातार बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। धूप नहीं निकलने के कारण मंडियों में भीगे धान को सुखाना भी मुश्किल हो रहा है। किसानों ने बताया कि तिरपाल डालने से ऊपर से गिरने वाले पानी से धान को कुछ हद तक बचा लिया गया, लेकिन फड़ पर जमा पानी नीचे से ढेरियों में चला गया। इससे धान नीचे से गीला हो गया।
किसानों को आशंका है कि यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ तो धान को सुखाने में कई दिन लग सकते हैं। वहीं, अधिक नमी के कारण खरीद प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। दो दिन से लगातार बारिश होने के कारण सोमवार को मंडियों में धान की आवक न के बराबर रही। ज्यादातर मंडियों में पूरे दिन केवल दो-तीन किसान ही धान लेकर पहुंचे। धूप नहीं निकलने से धान को सुखाना भी संभव नहीं हो पाया। किसानों को अब मौसम साफ होने और फसल सुखाने के बाद ही तौल व खरीद शुरू होने की उम्मीद है।
खेतों में धान की कटाई प्रभावित
लगातार बारिश से खेतों में धान की कटाई का काम भी प्रभावित हो गया है। खेतों में पानी और नमी होने के कारण कंबाइन मशीनें चलाना मुश्किल हो गया है। जिले में अधिकांश किसान हाथ से कटाई कराने के बजाय कंबाइन मशीनों से धान कटवाते हैं। ऐसे में खेतों के सूखने तक कटाई का काम प्रभावित रह सकता है। बारिश के कारण जिन खेतों में धान पककर तैयार है, वहां किसान मौसम साफ होने का इंतजार कर रहे हैं। कटाई में देरी होने से किसानों को फसल के नुकसान की भी चिंता सताने लगी है। वहीं खेतों में नमी अधिक रहने से कंबाइन के फंसने और मिट्टी खराब होने की समस्या भी आ सकती है।