संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। श्री गुरु रविदास महाराज जी की चरणछोह प्राप्त प्रसिद्ध ऐतिहासिक डेरा बाबा लाल दास कपालमोचन में रविवार को मासिक सत्संग का आयोजन किया गया। भजन और कीर्तन के माध्यम से श्री गुरु रविदास महाराज की वाणी का गुणगान किया गया।
सत्संग में उमड़ी हजारों की संख्या में संगत ने गुरु रविदास महाराज के मंदिर में माथा टेका और गद्दीनशीन संत निर्मल दास महाराज व अन्य संतों से आशीर्वाद प्राप्त किया। वहीं पुणे के ब्रह्मलीन संत सुखदेव वाघमारे को श्रद्धांजलि दी गई। पिछले दिनों संत सुखदेव वाघमारे ब्रह्मालीन हो गए थे।
संत निर्मल दास महाराज ने कहा कि संत सुखदेव वाघमारे अखिल भारतीय रविदासिया धर्म संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे जिन्होंने रविदासिया धर्म का खूब प्रचार प्रसार किया। उनके इस असीम योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। आज डेरे संत सुखदेव वाघमरे को संगत ने श्रद्धांजलि दी। संत निर्मल दास ने संगत को आह्वान किया कि वह गुरु रविदास महाराज जी को वाणी को जीवन में अपनाएं।
उन्होंने कहा कि नामदान की दीक्षा लेकर अपना जीवन सफल बनाएं। इधर-उधर भटकने की बजाय गुरु रविदास महाराज की शरण में आए। गुरु रविदास महाराज जी ने अपनी वाणी में एकता में रहने का आह्वान किया है। गुरु रविदास महाराज जी ने एक ऐसे बेगमपुरा राज की बात की है जिसमें किसी को कोई गम न हो, सभी एक समान हो, किसी से कोई भेदभाव न हो।
उन्होंने कहा कि शिक्षित समाज ही तरक्की करता है इसलिए अपने बच्चों को पढ़ाए और उन्हें नशे से दूर रखें। सभी धर्म का सम्मान करें, किसी की बुराई और चुगली न करें हमेशा दूसरों की मदद के लिए आगे आए। अगले वर्ष 650वां प्रकाशपर्व पूरे विश्व में बड़ी धूमधाम से मनाया जाएगा। संगत इस प्रकाश पर्व को यादगार बनाएं। इस अवसर अमरनाथ ग्यासड़ा, मास्टर रमेश कुमार, महिंद्र नागरा, रामलाल समेत अन्य लोग मौजूद रहे।