पानीपत फिल्म के विरोध में सोमवार को जाट समाज के लोगों ने लघु सचिवालय में प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि फिल्म में महाराजा सूरजमल के बारे में गलत तथ्य दिखाकर उनके उच्च चरित्र व सम्मान को नीचा व तोड़ मरोड़ कर दिखाया गया। जिससे जाट समाज के लोगों में भारी रोष है। उन्होंने इस संबंध में तहसीलदार को डीसी के नाम ज्ञापन देकर फिल्म के प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। इससे पहले जाट समाज के लोग जाट धर्मशाला कपाल मोचन में एकत्रित हुए। यहां उन्होंने जाट सभा के बैनर तले बैठक का आयोजन कर फिल्म का विरोध किया।
जाट सभा के पदाधिकारियों ने कहा कि फिल्म में महाराजा सूरजमल को लालची शासक के रूप में दिखाया गया है। महाराजा सूरजमल दयालु राजा थे, यह सीन फिल्म से हटाया जाना चाहिए। गौरतलब है कि फिल्म में भरतपुर के संस्थापक महाराजा सूरजमल को लालची शासक के रूप में दर्शाने का विरोध हो रहा है। फिल्म में महाराजा सूरजमल को मराठा पेशवा सदाशिव राव से संवाद के दौरान इमाद को दिल्ली का वजीर बनाने व आगरा क किला उन्हें सौंपे जाने की मांग करते दिखाया गया है। इस पर मराठा पेशवा सदाशिव राव आपत्ति जताते हैं और अहमदशाह अब्दाली के खिलाफ युद्ध में साथ देने से सूरजमल इनकार कर देते हैं। जाट सभा के पदाधिकारियों ने बताया कि फिल्म में सूरजमल का चरित्र तोड़ मरोड़ कर गलत तरीके से दिखाया गया है। जो फिल्म निर्माता द्वारा ऐसा कृत्य करने पर पूरे उत्तर भारत के जाट समाज के लोगों में रोष व्याप्त है। जिसके कारण उत्तर भारत के जाट बाहुल राज्य के साथ पूरे भारत में रह रहे उत्तर भारतीयों में रोष पनप रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने तुरंत प्रभाव से फिल्म पानीपत दिखाने पर प्रतिबंध नहीं लगाया तो वे आंदोलन तेज कर देंगे।