फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गर्मी में बिजली कटों ने रात में उड़ाई नींद दिन में छीना चैन

विज्ञापन
विज्ञापन
यमुनानगर। गर्मी के सितम के बीच बिजली के अघोषित कटों ने रात में लोगों की नींद और दिन में चैन छीन लिया है। जिले में शहर से देहात तक बार-बार बिजली के कट लग रहे हैं। यह हालात पिछले दो सप्ताह से हैं, जिसमें पहले बिजली कटों का कोई निर्धारित समय नहीं था, जिससे कट से पहले लोग बिजली आधारित अपने काम पूरे नहीं कर पा रहे थे। इससे घरों में पेयजल से लेकर उद्योगों में उत्पादन की दिक्कत बढ़ी। हालांकि अब बिजली निगम ने बिजली कटों का शेड्यूल जारी कर दिया है, किंतु शेड्यूल में दिए समय से अधिक कट लग रहे हैं। इस बिजली कटौती से इंडस्ट्री में 30-50 फीसद तक उत्पादन घटा है, वहीं घरों-दफ्तरों में गर्मी से बेहाल लोग पेयजल व अन्य दिक्कतों से परेशान हैं।
विज्ञापन

यमुनानगर सर्कल में तीन डिवीजन हैं, जिनमें यमुनानगर, जगाधरी व बिलासपुर शामिल हैं। इन पर कुल 3.90 लाख उपभोक्ता हैं, जिनमें 2.96 लाख घरेलू, 86 हजार कृषि व आठ हजार व्यावसायिक हैं। पूरे सर्कल पर बीते वर्ष अप्रैल माह के अंत में 60 लाख यूनिट प्रतिदिन बिजली की मांग थी, जो लगभग पूरी होने से बीते वर्ष बिजली के अघोषित कट नहीं थे, लेकिन इस बार बीते वर्ष की 60 लाख यूनिट बिजली की मांग बढ़कर 67 लाख यूनिट तक पहुंच गई है, जबकि बिजली निगम के पास आपूर्ति के लिए 50-52 लाख यूनिट बिजली ही उपलब्ध है। इस तरह मांग से करीब 15 लाख यूनिट कम बिजली उपलब्ध होने पर निगम अफसरों को बिजली के कट लगाने पड़ रहे हैं। जिन घरों व दफ्तरों में इन्वर्टर हैं, वो भी कुछ घंटे में जवाब दे रहे हैं। पंखे-कूलर व एसी, सब बंद होने पर लोग गर्मी में बेहाल हैं। साथ ही कई बार बिजली कट पेयजल आपूर्ति के समय लगने पर लोग गर्मी में घंटों पीने के पानी को भी तरस रहे है। ------------------
बिजली कटों का संभावित शेड्यूल
क्षेत्र कट का कुल समय
इंडस्ट्री आठ घंटे
शहर साढ़े छह घंटे
गांव चार घंटे
निगम से जारी उक्त शेड्यूल में दिखाए गए कटों के कुल समय से कई क्षेत्र में कई घंटे अधिक के कट लग रहे हैं।
--------------
वर्जन
बिजली की खपत अधिक और उपलब्धता कम है, इसलिए बिजली कट लगाने पड़ रहे हैं। बिजली खरीदने को लेकर उच्चस्तर पर बातचीत चल रही है, जिससे जल्द बिजली की मांग के अनुसार उपलब्धता होगी और बिजली कटों की परेशानी खत्म होगी।
विज्ञापन

-राजेंद्र कुमार, एसई, बिजली निगम।
संवाद के लिए
फोटो:- 36
बिजली कट से उत्पादन 50 प्रतिशत तक घटा, दिनचर्या के काम भी प्रभावित
-किसान बोले, सिंचाई के लिए नहीं मिल रही बिजली, सूखने लगी है फसलें
-गृहिणियां बोली-घरेलू काम नहीं हो पा रहे, बिगड़ गई दिनचर्या।
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। हर दिन के साथ बिजली संकट गहराता जा रहा है। जिसका असर हर वर्ग पर पड़ रहा है। प्रचंड गर्मी के कारण बिजली की खपत दोगुना हो गई है। वहीं उत्पादन आवश्यकता से आधा हो रहा है। ऐसे में बिजली निगम लगातार कट लगा रहा है। कट के कारण जन जीवन प्रभावित है। घरेलू कार्यों के साथ उत्पादन पर भी इसका असर पड़ रहा है। प्रतिष्ठानों, औद्योगिक इकाइयों, संस्थानों को अपने स्तर पर बिजली का वैकल्पिक बंदोबस्त करना पड़ रहा है। स्कूल, कॉलेज सहित अन्य शिक्षण संस्थानों, फैक्ट्रियों, बैंक, अस्पताल, कार्यालयों में बिजली के जनरेटर का प्रयोग किया जा रहा है। ऐसे में ईंधन की खपत भी बढ़ गई है। बिजली के कारण जिले की प्लाई व मैटल इंडस्ट्रीज को करोड़ों रुपये का नुकसान हो चुका है। इसे लेकर अमर उजाला ने शहर के लोगों से संवाद किया। इस दौरान कारोबारियों, उद्यमियों, व्यापारियों, गृहिणियों सहित अन्य लोगों ने अपने विचार रखे।
कोट्स
सरकार की विफलता
साढौरा से कांग्रेस विधायक रेणुबाला ने कहा कि बिजली की किल्लत सरकार की विफलता है। सरकार ने इसे लेकर पूर्व में तैयारी नहीं की। इस बार गर्मी समय से पहले पड़ने लगी है। मौसम विभाग ने इसके बारे में कई माह पूर्व अलर्ट कर दिया था। गर्मी में बिजली की खपत बढ़ जाती है, लेकिन सरकार ने इसका कोई बंदोबस्त नहीं किया। सरकार की लापरवाही जनता पर भारी पड़ रही है। अघोषित कटों के कारण लोगों के काम प्रभावित हो रहे हैं। सरकार इसका जल्द समाधान निकाले।
फोटो:- 37
----------------
सड़कों पर उतरने को होंगे मजबूर
रादौर से कांग्रेस विधायक डॉ. बिशन लाल सैनी ने कहा कि बिजली की आपूर्ति सरकार की जिम्मेदारी है। समय रहते सरकार ने प्लांट की मरम्मत, उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर काम नहीं किया। जिसके कारण पूरे राज्य में बिजली संकट गहराने लगा है। दूसरे राज्यों को बिजली देने वाले प्रदेश को अब स्वयं के लिए खरीदनी पड़ रही है। इसे लेकर जनता में सरकार के खिलाफ भारी रोष है। यही हाल रहा तो कांग्रेस लोगों के समर्थन में सड़क पर उतरने के लिए मजबूर हो जाएगी।
फोटो:- 38
-----------------------
कारोबार हो गया चौपट
हरियाणा उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेशाध्यक्ष महेंद्र मित्तल ने कहा कि बिजली जीवन की मूल आवश्यकता है। इसके बिना कोई काम संभव नहीं है। लगातार लग रहे कटों के कारण बाजार में भारी मंदी छाने लगी है। कारोबार चौपट हो गया है। व्यापारियों को जनरेटर के सहारे काम चलाना पड़ रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक हानि हो रही है। गर्मी के कारण दिन में ग्राहक घर से नहीं निकलते और शाम को बिजली रहते लोग अपने घर का काम निपटने में व्यस्त रहते हैं।
फोटो:- 39
-----------
स्थायी समाधान हो
व्यापारी नेता एवं कारोबारी संजय मित्तल ने कहा कि गर्मी में बिजली की खपत बढ़ जाती है। इस बार गर्मी जल्द आ गई है। जून जैसी गर्मी अभी से पड़ने लगी है। जिससे कारण इन दिनों सामान्य से अधिक बिजली की आवश्यकता है। लगातार बिजली कटों से हर वर्ग प्रभावित है। दुुकानदारी 40 प्रतिशत ही रह गई है। बिजली के कारण ग्राहक भी घरों से नहीं निकल पाते हैं। जो समय शाम को दुकानदारी का होता है उस समय लोगों अपने निजी काम में व्यस्त हो जाते हैं। शाम को बिजली गुल हो जाती है।
फोटो:- 40
------------------
30 से 50 फीसदी तक घटा उत्पादन
जगाधरी के कारोबारी सुभाष अरोड़ा ने बताया कि बार-बार बिजली कट से मेटल, प्लाई व अन्य इकाइयों के उत्पादन पर असर पड़ रहा है। रोज का उत्पादन 30 से 50 फीसदी तक घट गया है,चूंकि ज्यादातर काम बिजली आधारित है। डीजल महंगा है, इसलिए जनरेटर का ज्यादा प्रयोग भी नहीं कर पा रहे हैं। बिजली जाने पर काम बंद होने पर लेबर से भी पूरा काम नहीं ले पा रहे जबकि, उनका मेहनताना पूरा देना पड़ रहा है।
फोटो:- 41
-------------
सरकार बिजली के प्रति गंभीर
भाजपा विधायक घनश्याम दास अरोड़ा ने कहा कि सरकार बिजली संकट को लेकर गंभीर है। इसके निदान के लिए लगातार सरकार मंत्रणा कर रही है। सरकार आपूर्ति के लिए दूसरे राज्यों से बिजली लेने को लेकर विचार कर रही है। इसके अलावा ऐसी स्थिति दोबारा न बने इसके लिए स्थायी प्रबंध करने को लेकर रणनीति तैयार की जा रही है। सरकार जल्द ही इसका समाधान निकल लेगी। लोगों को परेशानी का सामना नहीं करने दिया जाएगा।
फोटो:- 42
----------------
सरकार दूसरे राज्य में बेच रही बिजली
किसान नेता सतपाल कौशिक ने कहा कि सरकार प्रदेश की बिजली दूसरे राज्यों को बेच रही है। सतपाल कौशिक ने कहा कि सरकार ने 487 मेगावाट (एक करोड़ 25 लाख यूनिट) बिजली गुजरात भेजी है। जिस कारण प्रदेश में बिजली संकट गहराने लगा है। उन्होंने कहा कि प्रचंड गर्मी के कारण बिजली की अधिक आवश्यकता है। किसानों को सिंचाई करने के लिए बिजली नहीं मिल पा रही है। अघोषित कट के कारण किसानों की दिनचर्चा बिगड़ गई है। किसानों को अपनी फसलों की चिंता सता रही है। सरकार बाहर भेजने के बजाए पहले प्रदेशवासियों को बिजली दे।
फोटो:- 43
------------
बिजली संकट से खेती हो रही प्रभावित
भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष संजू गुंदियाना ने कहा कि बिजली संकट के कारण खेती प्रभावित हो रही है। फसल बचाने के लिए किसान सड़कों पर उतर आया है। किसानों को जरूरत से आधी बिजली भी नहीं मिल पा रही है। सिंचाई के लिए जनरेटर का प्रयोग करना पड़ रहा है। डीजल की कीमत आसमान पर है। जिससे किसानों की लागत दोगुणा होने लगी है। सरकार ने इस पर पहले ध्यान नहीं दिया और मुसीबत में जनप्रतिनिधि अपने कार्यालयों में बैठकर बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ दिनों में इसका समाधान नहीं किया गया तो बिजली केंद्रों पर ताला लगा दिया जाएगा।
फोटो:- 44
------------
सरकार जनता से कर रही अन्याय
भारतीय किसान यूनियन के जिला निदेशक एवं अंबाला जोन प्रभारी मनदीप सिंह ने कहा कि सरकार जनता से अन्याय कर रही है। प्रदेश की बिजली दूसरे राज्यों में भेज कर जनता को वंचित रखा जा रहा है। किसान ही नहीं हर वर्ग इससे परेशान है। कई स्थानों पर बिजली न होने के कारण पेयजल संकट गहरा गया है। इन दिनों सूरजमुखी, मूंग, गन्ना, उड़द, सब्जियों के लिए सिंचाई की जरूरत है। संकट के कारण किसानों को बिजली नहीं मिल पा रही है। जिससे किसानों की मेहनत सूखने के कागार पर है। सरकार को जनता की कोई चिंता नहीं है।
फोटो:- 45
-----------
दिनचर्या के काम प्रभावित
गृहिणी रेखा ने कहा कि बिजली कटौती के कारण दिनचर्या के काम प्रभावित हो रहे हैं। कट का कोई समय नहीं है। ऐसे समय पर कट लग रहे हैं, जिस समय बिजली की ज्यादा आवश्यकता होती है। सुबह के समय बिजली जा रही है। यह समय बच्चों को स्कूल भेजने व लोगों के काम पर जाने का होता है। बिजली न होने के कारण पानी भी नहीं मिल पाता है। इससे दिनचर्या के सभी कार्य ठप हो गए हैं। सुबह बच्चों को स्कूल भेजने के लिए अल सुबह तैयारी करनी पड़ रही है। इससे स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।
फोटो:- 46
--------------
घरेलू उत्पादन पूरी तरह ठप
स्वयं सहायता समूह चलाने वाली निर्मला ने कहा कि बिजली के अघोषित कटों के कारण रोजमर्रा के काम भी ठप हो गए हैं। समूह में महिलाएं घक बैठकर घरेलू उत्पाद से अपनी आजीविका चला रहे हैं। उनके काम में बिजली की आवश्यकता होती है, लेकिन अघोषित कटों के कारण उनका काम ठप हो गया है। सिलाई, कढ़ाई, अचार, मसाला इत्यादि घरेलू उद्योग पूरी तरह से ठप पड़े हैं। चूंकि यह जनरेटर और उसका खर्च वहन नहीं कर पाएंगे। इससे उत्पादन लागत बढ़ जाएगी। ऐसे में उन्हें रोजाना हजारों रुपये का नुकसान हो रहा है और आजीविका प्रभावित हुई है।
फोटो:- 47
-------------
बिक्री 75 प्रतिशत घटी
सेनेटरी सामान के कारोबारी केतन खुल्लर ने बताया कि बिजली के कारण उनका काम ठप हो गया है। केतन ने बताया कि उनके काम में 75 प्रतिशत काम बिजली का है। पाइप फिटिंग, कटिंग इत्यादि में बिजली की आवश्यकता होती है। पर्याप्त बिजली आपूर्ति न होने के कारण लोग काम नहीं लगवा रहे हैं। इससे उनकी बिक्री 75 प्रतिशत प्रभावित हुई है। वहीं इससे जुड़े दैनिक श्रमिकों को भी काम न मिलने के कारण आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है।
विज्ञापन

फोटो:- 48
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें