संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले की मंडियों में पॉपुलर लकड़ी की आवक अचानक बढ़ने से एक सप्ताह के दौरान दाम 200 से 300 रुपये प्रति क्विंटल तक गिर गए हैं। इससे लकड़ी उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ गई है। वहीं व्यापारी भी बाजार की मौजूदा स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। कारोबारियों का कहना है कि यदि आवक इसी तरह बनी रही और मांग में तेजी नहीं आई तो आने वाले दिनों में कीमतों पर और दबाव बन सकता है।
मंडी में कुछ दिन पहले तक पॉपुलर लकड़ी 1700 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रही थी, लेकिन अब इसके भाव घटकर 1400 से 1450 रुपये प्रति क्विंटल रह गए हैं। मंडी में लकड़ी की आपूर्ति अचानक बढ़ने से मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ गया है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है।
मंडी के आढ़ती मुस्ताक मलिक, बबलू राव, संदीप शर्मा, तबरेज खान, इरफान खान और अमित कुमार ने बताया कि पिछले कई दिनों से मंडी में लगातार बड़ी मात्रा में पॉपुलर लकड़ी पहुंच रही है। अधिक आवक के कारण खरीदारों के पास विकल्प बढ़ गए हैं, जिससे कीमतों में 200 से 300 रुपये प्रति क्विंटल तक की गिरावट दर्ज की गई है।
भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष संजू गुंदियाना और भारतीय किसान संघ के प्रदेश महामंत्री रामबीर चौहान ने आरोप लगाया कि प्लाईवुड कारोबारियों की मिलीभगत के चलते किसानों से सस्ती दरों पर लकड़ी खरीदी जाती है। इससे प्रति ट्रॉली किसान को औसतन 50 हजार रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किसान नेताओं ने कहा कि जब लकड़ी के दाम घटाए जा रहे हैं तो प्लाईवुड के दाम भी कम किए जाने चाहिए, ताकि आम उपभोक्ताओं को भी इसका लाभ मिल सके। यदि बाजार में पारदर्शिता नहीं लाई गई तो इसका सबसे अधिक नुकसान किसानों को होगा। उन्होंने सरकार से लकड़ी के बाजार पर निगरानी रखने और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है, जिससे किसानों को राहत मिल सके।
जिले में प्लाईवुड की 350 इकाइयां
यमुनानगर देश के प्रमुख प्लाईवुड उद्योग केंद्रों में शामिल है। जिले में करीब 350 प्लाईवुड फैक्टरियां संचालित हैं। इसके अलावा लगभग 400 पिलिंग यूनिट और सॉ मिल भी कार्यरत हैं। इन उद्योगों में प्रतिदिन करीब 7000 क्यूबिक मीटर प्लाईवुड का उत्पादन होता है, जिसे देशभर के विभिन्न राज्यों में भेजा जाता है। वर्तमान समय में कम कीमतों का लाभ खरीदारों को मिल रहा है, लेकिन किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिलने से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
यूपी से आती है 70 प्रतिशत लकड़ी
जिले में मानकपुर व मंडौली में दो लकड़ी मंडियां हैं। इनमें ज्यादातर लकड़ी पॉपुलर की होती है। ट्रैक्टर-ट्रालियों व ट्रकों में पॉपुलर की लकड़ी ज्यादातर उत्तर प्रदेश व पंजाब से आती है। इनमें उत्तर प्रदेश से आने वाली लकड़ी की मात्रा 70 प्रतिशत, यमुनानगर का 15 प्रतिशत व बाकी का हिस्सा पंजाब व अन्य जिलों का है। दोनों मंडियों में पहले औसतन 900 से 1000 ट्रैक्टर-ट्राली में लकड़ी आती थी। अब यह संख्या 1500 तक पहुंच चुकी है।
कोई भी प्लाईवुड कारोबारी रेट को लेकर मोनोपली नहीं करता। फैक्टरी संचालक अपनी क्षमता के हिसाब से ही लकड़ी खरीदेगा। जब आवक ज्यादा हो जाती है तो लकड़ी की कीमत कम हो जाती है। -जेके बिहानी, अध्यक्ष, हरियाणा प्लाईवुड एसोसिएशन यमुनानगर