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Yamuna Nagar News: महापड़ाव से पहले पुलिस की दबिश, थमाए नोटिस

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यमुनानगर। चंडीगढ़ में भारतीय किसान यूनियन के 26 से 28 नवंबर तक होने वाले महापड़ाव से पहले पुलिस ने किसानों के घर दबिश दी। इस दौरान कई किसान तो भूमिगत हो गए जबकि कुछ किसानों को नोटिस थमाकर चंडीगढ़ में होने वाले धरने से दूर रहने की चेतावनी दी। अब किसानों को डर है कि पुलिस उन्हें रात में ही नजरबंद या गिरफ्तार कर सकती है। इसी के चलते कई किसान शनिवार दोपहर को ही अपने घरों से निकल गए। उधर किसान भी इस चंडीगढ़ कूच के लिए तैयार हैं।
उल्लेखनीय है कि अपनी मांगों के समर्थन किसानों ने चंडीगढ़ में महापड़ाव की चेतावनी दी हुई है। इसमें विभिन्न जिलों के किसान शामिल होंगे। इन किसानों को रोकने के लिए पूरा प्रयास किया जा रहा है। किसान इस बात पर अडिग हैं कि वह सैकड़ों वाहनों के साथ चंडीगढ़ के लिए रविवार सुबह रवाना होंगे। यदि पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो इसका जवाब दिया जाएगा। भाकियू जिला अध्यक्ष सुभाष गुर्जर के घर खुद थाना सदर एसएचओ जोगिंद्र सिंह पहुंचे। पुलिस की इस कार्रवाई के खिलाफ सलेमपुर में किसानों ने रोष प्रकट भी किया।
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इन किसानों, कर्मचारी नेताओं को थमाया नोटिस
चंडीगढ़ में होने वाले महापड़ाव में किसानों के अलावा कई कर्मचारी संगठन भी हिस्सा ले रहे हैं। पुलिस की तरफ से जिले में भाकियू प्रदेश उपाध्यक्ष प्रदीप नगला, भाकियू जिलाध्यक्ष सुभाष गुर्जर, चमरौड़ी गांव में जिला संरक्षक जयपाल, संखेड़ा गांव में उपप्रधान संदीप सिंह, धौडंग गांव में जिला सलाहकार एडवोकेट साहब सिंह गुर्जर, मारवा खुर्द गांव में अखिल भारतीय किसान सभा के प्रदेशाध्यक्ष गुरभजन सिंह, प्रदेश उपाध्यक्ष धर्मपाल चौहान, पांजूपुर गांव में मिड डे मिल वर्कर यूनियन की जिला सचिव शरबती देवी, कैंप में आशा वर्कर यूनियन की जिला कोषाध्यक्ष कर्मजीत कौर, एसकेएस के जिला प्रधान महिपाल सोढे, तेजली में जरनैल सिंह व चमरौड़ी गांव में अखिल भारतीय किसान सभा के जिला सचिव महिपाल को नोटिस दिया गया।
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नोटिस से डरने वाले नहीं हैं किसान : सुभाष गुर्जर
भाकियू जिलाध्यक्ष सुभाष गुर्जर ने कहा कि पुलिस किसान नेताओं के घर उन्हें नोटिस देने के लिए पहुंची थी। किसानों को कहा गया है कि वह धरने में न जाएं। परंतु कोई भी किसान पीछे नहीं हटेगा। किसानों के वाहन तैयार हैं। पुलिस किसान नेताओं को गिरफ्तार कर सकती है इसलिए कोई भी अपने घर पर मौजूद नहीं हैं। वह अज्ञात जगहों पर रह रहे हैं। चंडीगढ़ में हजारों की संख्या में किसान तीन दिवसीय महापड़ाव में हिस्सा लेने जरूर जाएंगे।
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