कपालमोचन। अंतरराज्यीय श्री कपाल मोचन-आदिबद्री मेले में शुक्रवार को करीब 75 हजार श्रद्धालु पहुंचे जबकि पहले दिन गुरुवार को श्रद्धालुओं की संख्या 50 हजार आंकी गई थी। इस तरह मेले के दो दिनों में सवा लाख श्रद्धालु पहुंच गए। जिनमें हजारों श्रद्धालु आखिरी दिन की भीड़ से बचने के लिए पहले ही तीनों सरोवरों का स्नान व धार्मिक स्थलों पर दर्शन व पूजन कर लौट गए।
करीब एक लाख श्रद्धालुओं ने 27 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा के स्नान तक धर्मशालाओं व तंबुओं में डेरा डाल लिया। आज तीसरे दिन मेले में एक से डेढ़ लाख श्रद्धालु आने से कुल संख्या ढाई लाख तक हो सकती है। मेले में शुक्रवार को मेले से सुबह से रात तक भी श्रद्धालुओं का आना व जाना लगा रहा। श्रद्धालुओं ने कपालमोचन, ऋणमोचन व सूरजकुंड, तीनों पवित्र सरोवरों में डुबकी लगाकर मोक्ष की कामना की। साथ ही यहां बने मंदिर, गुरुद्वारा साहिब व प्राचीन घाटों पर पूजन व दीपदान किया। देर शाम तक मेला क्षेत्र में नए श्रद्धालुओं के आने व पहले आ चुके श्रद्धालुओं का लौटना लगा रहा। मेले में श्रद्धालुओं के आने-जाने के चलते धूल न उड़े, इसके लिए मेला प्रशासन की ओर से मेला क्षेत्र में लगातार पानी का छिड़काव किया गया। साथ ही जगह-जगह पुलिस तैनात व गश्त पर रही। पंजाब सहित हिमाचल, उत्तराखंड, यूपी व दिल्ली के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु कपाल मोचन के साथ आदिबद्री केदारनाथ, मंत्रा देवी मंदिर, पंचमुखी हनुमान मंदिर ढाका बसातियांवाला में भी दर्शन के लिए पहुंचे।
खूब बिके बर्तन, पीडी, चक्की-
मेले में सबसे ज्यादा खरीदारी श्रद्धालु बर्तनों, पीडी व आटा चक्की की कर रहे हैं। ऐसी मान्यता है कि मेले में आकर पीडी खरीदकर ले जाने से परिवार में पीढ़ी बढ़ती है और आटा चक्की खरीदने से घर पर अन्न भंडार भरते हैं। ऐसे ही मेले से लौटते समय श्रद्धालु बर्तन नगरी जगाधरी के पुराने समय से बर्तन खरीद ले जाते हैं। पहले मेले से जगाधरी आकर बर्तन खरीदते थे, पर कुछ वर्षों से मेले में ही लग रही बर्तन की दुकानों से खरीद ले जाते हैं।
बेरी व कदम पर सूत लपेटने की होड़-
सूरज कुंड सरोवर के किनारे खड़े बेरी और कदम के पेड़ की श्रद्धालु पूजा अर्चना करते हैं। मान्यता है कि इस बेरी का बेर खाने से संतान सुख मिलता है। वहीं सूरज कुंड के दूसरे छोर पर श्री राधा कृष्ण मंदिर के साथ कदम का पेड़ है। यह कदम का पेड़ महाभारत के समय का है। मान्यता है कि कदम व बेरी के पेड़ पर सूत बांधने से विवाह में आ रहे विघ्न टलते हैं व संतान सुख मिलता है। इसी कारण शुक्रवार को दोनों पेड़ों पर सूत बांधने व बेरी से बेर तोड़ने को लेकर महिलाओं व अन्य श्रद्धालुओं में होड़ दिखी।
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मेले पहुंचने के मुख्य रास्ते पर अंधेरा, बरम व अन्य सुरक्षा प्रबंध गायब-कपाल मोचन मेले पहुंचने के लिए मुख्य रास्ता जगाधरी बिलासपुर स्टेट हाईवे है। इसी से पंजाब सहित अन्य राज्यों के श्रद्धालु रोडवेज व अपने वाहनों से मेले में आ रहे हैं। इस रास्ते रक्षक विहार चौक से जिला जेल तक सजावटी व अन्य स्ट्रीट लाइट लगे हैं, पर इसके आगे बिलासपुर तक पोल तो हैं, पर उन पर लाइट नहीं हैं। पूरे रास्ते नाममात्र स्ट्रीट लाइट हैं या आसपास के घरों, दुकानों व अन्य प्रतिष्ठानों के बाहर लगी लाइटों या खुद वाहनों की लाइट का सहारा है। एक ओर शाम बाद अंधेरे में रोशनी के लिए स्ट्रीट लाइट नहीं हैं, वहीं मार्ग से बरम सहित सड़क सुरक्षा के लिए अन्य यातायात सूचक व उपकरण गायब हैं। जबकि मार्ग के बीच कई तीव्र मोड़ भी है, जिससे आने वाले दिनों में धुंध के बीच यहां से निकलना जोखिम भरा है।