यमुनानगर। जहरीली शराब पीने से हुई 18 लोगों की मौत और ठेकेदारों समेत हिस्सेदारों के सलाखों के पीछे जाने के बाद आबकारी विभाग भी सख्त एक्शन मोड में आ गया है। विभाग ने वीरवार को कार्रवाई करते हुए जिले के 11 जोन में चल रहे शराब के 22 ठेकों को सील कर दिया। इन सभी ठेकों का लाइसेंस बरेहड़ी गांव के महेंद्र सिंह कांबोज के नाम पर है। विभाग ने महेंद्र सिंह के नाम पर चल रहे एल-13 (देशी शराब का गोदाम) का लाइसेंस भी रद्द कर दिया है। उधर महेंद्र सिंह पर दो करोड़ 51 लाख रुपये का जुर्माना भी बकाया है। यदि आरोपी इस जुर्माने को अदा नहीं करता तो उसकी संपत्ति को विभाग अटैच कर सकता है। आबकारी विभाग के अधिकारी आशुतोष राजन ने बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार यमुनानगर के 11 जोन के लाइसेंस रद्द कर दिए हैंं। ये सभी जोन महेंद्र सिंह कांबोज के नाम पर थे। इन ठेकों की दोबारा नीलामी कराई जाएगी ताकि सरकार को राजस्व नुकसान न हो।
इन ठेकों को किया सील
इस कार्रवाई के चलते विभाग ने जोन नंबर तीन कोटला-रत्तूवाला, जोन नंबर नौ बलाचौर- छछरौली, जोन 20 राव-खुर्दबन, जोन 21 में जठलाना-पालेवाला, जोन 22 में हरनौली-सलेमपुर बांगर, जोन 23 में भूखड़ी- हरेवा, जोन 28 में बूड़िया, जोन 34 में अग्रसेन चौक-तेजली, जोन 35 आजाद नगर-गधौली, जोन 43 कांसापुर रोड-ससौली व जोन 50 में फर्कपुर-मंडेबरी के ठेकों व उप ठेकों को सील किया है। जोन 50 में फूंसगढ़ ठेका पहले से ही सील है। बताया जाता है कि इसी ठेके पर अंबाला में चल रही जहरीली शराब की फैक्टरी से शराब लाई जाती थी। इन सभी ठेकों की दोबारा से नीलामी कराई जाएगी। इन ठेकों का लाइसेंसधारक महेंद्र सिंह फिलहाल अभी जेल में है। ठेके में निलंबित हो चुके प्रदेश कांग्रेस कमेटी सदस्य मांगे राम मारूपुर, गौरव कांबोज बुबका, भाटली गांव के सुशील कुमार उर्फ टिंकू व नाचरौन के अमरनाथ हिस्सेदार थे। वहीं गैंगस्टर मोनू राणा ने भी ठेके में पैसा लगा रखा था। लाइसेंसी के जेल जाने के बाद सबसे बड़ी समस्या यह खड़ी हुई कि आबकारी विभाग की फीस कौन भरेगा। आरोपियों ने यह ठेका कूलपुर निवासी प्रदीप को सबलेट किया हुआ है।
कांग्रेस नेता समेत चार डिफाल्टर घोषित
जहरीली शराब प्रकरण में गिरफ्तार कांग्रेस नेता मांगे राम मारूपुर, गौरव कांबोज, सुशील कुमार उर्फ टिंकू व अमरनाथ को विभाग ने डिफाल्टर घोषित कर दिया है। यह सभी कई सालों से शराब कारोबार में हैं। पहले अपने नाम से ठेके लेते थे, लेकिन बाद में महेंद्र सिंह के नाम से 11 जोन का लाइसेंस लिया। सभी की ठेकों में हिस्सेदारी थी। डिफाल्टर रहने तक इन्हें शराब के ठेके अलॉट नहीं हो सकेंगे। अग्रसेन चौक स्थित एल-13 गोदाम भी महेंद्र सिंह के नाम पर है। इस प्रकरण में इस गोदाम की भी जांच की गई थी, जिसमें स्टाॅक में अंतर मिला था। जांच के दौरान यहां से 10500 पेटियां देसी शराब की कम मिली थीं। यह अंतर मिलने के बाद आबकारी विभाग की टीम ने चार नवंबर को इस गोदाम को सील कर दिया था।