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कवियों ने सामाजिक समरसता व भाईचारे पर प्रस्तुत की रचनाएं

Sun, 24 Apr 2016 12:43 AM IST
yamuna nagar
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यमुनानगर। जगाधरी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज में हरियाणा साहित्य अकादमी की ओर से साहित्यिक संवाद कार्यक्रम के तहत सामाजिक समरसता पर काव्य गोष्ठी हुई। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में अकादमी की निदेशक कुमुद बंसल रही। जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज प्राचार्य डॉ. पीके बाजपेई ने की। यमुनानगर से साहित्य अकादमी के सदस्य डॉ. उमेश प्रताप वत्स भी मौजूद रहे और मंच संचालन डॉ. अनिल सवेरा ने किया।


सर्वप्रथम मुख्य अतिथि एवं अन्य अतिथियों ने सरस्वती मां और भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। डॉ. गुलाब सिंह ने मंचस्थ अतिथियों का परिचय कराया। डॉ. बिंदु शर्मा, मदन शेखपुरी, श्रीश कुमार तथा डॉ. केएन कपूर ने अतिथियों का स्वागत किया। न्यू हैप्पी पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। इसके पश्चात जिलेभर से आए विभिन्न कवियों ने सामाजिक समरसता तथा भाईचारा विषय पर रचनाएं प्रस्तुत की।
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रचना प्रस्तुत करने वाले साहित्यकारों में वीरेंद्र कुमार, जंगशेर शास्त्री, सुरेखा, राजीव सोनी, डॉ. सुनीता, डॉ. वंदना गुप्ता, रवि कांबोज, रमेश भारती, महेंद्र बेंजवाल शास्त्री, सतीश मिश्रा, शारदा शर्मा, बलदेव राज भारती, डॉ. हरिकिरण, सतबीर चौहान, आचार्य रणवीर शास्त्री, रामस्वरूप चौहान, अशोक कांबोज, डॉ. प्रतिमा शर्मा, डॉ. सरोज बाला, डॉ. विनय चंदेल, नरेश शोख, डॉ. उमेश प्रताप वत्स, डॉ. संजीव चौधरी, डॉ. बी मदनमोहन, अशोक अग्रवाल, डॉ. अनिल गोयल (सवेरा), डॉ. लक्ष्मी गुप्ता, अंजू बाजपेई, मदन शेखपुरी, डॉ. केएन कपूर आदि मौजूद रहे। साहित्य अकादमी के सदस्य डॉ. उमेश प्रताप वत्स ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों, श्रोतागणों व कॉलेज प्रशासन का धन्यवाद किया। मुख्य अतिथि कुमुद बंसल ने कहा कि साहित्य समाज को दिशा देने में सक्षम है। साहित्य समाज में समरसता तथा भाईचारे का संदेश देने में एक सशक्त माध्यम साबित हो सकता है।

इसलिए में कॉलेज प्राचार्य तथा कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. पीके बाजपेई ने कहा कि साहित्यकार समाज की आवाज होते हैं। साहित्यकारों को चाहिए कि अपनी रचनाओं से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए कार्य करें। कार्यक्रम की समाप्ति वंदे मातरम् गान से हुई। कार्यक्रम व्यवस्था में डॉ. बहादुर सिंह, श्रीश बेंजवाल, डॉ. सूरजभान, तरसेम, आशीष मेहता के साथ सरस्वती साहित्य मंच हरियाणा एवं संस्कार भारती का भी योगदान रहा। मौके पर सुरेंद्र गोयल, ब्रह्मदत्त शर्मा, मीना कांबोज, सुनील कुमार, मदन चौहान, डॉ. अश्वनी कुमार, विवेक आर्य, विकास शर्मा, डॉ. सतीश कुमार, डॉ. उदयभान शर्मा, जयप्रकाश सिंह आदि मौजूद रहे।
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कवियों ने रचनाओं से बांधा समां: आचार्य रणवीर शास्त्री  ने कहा कि अपनों के दरमियां सियासत फिजूल है, मकसद न हो कोई तो बगावत फिजूल है। कवयित्री सतबीर चौहान ने अपनी कविता में कहा कि टूट कर भी मेरा हौसला चट्टान का है, यही वक्त आज मेरे इम्तेहान का है। कवि उमेश प्रताप वत्स ने कहा कि फिर वसुधैव कुटुम्ब का यह नारा, नारा नहीं महामंत्र होगा। कवि अशोक कांबोज ने कहा कि तब निशा तारों जड़ी एक ओढनी को ओढ़ आती, सामने चिंतन को मेरे प्रश्न यह एक छोड़ जाती। इसी तरह अन्य कवियों ने भी अपनी रचनाओं से पूरे कार्यक्रम के दौरान समा बांधे रखा।
 
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