संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। नगर निगम के सफाई कर्मचारियों की हड़ताल का असर अब आम लोगों की दिनचर्या पर दिखाई देने लगा है। शहर में जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर और फैलती दुर्गंध के कारण लोगों ने सुबह की सैर से किनारा करना शुरू कर दिया है। जिस सुबह की सैर से स्वास्थ्य लाभ मिलना चाहिए, वहीं अब संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ता दिखाई दे रहा है।
वहीं मंगलवार को भी नगर निगम के सफाई कर्मचारी हड़ताल पर रहे, जिसके चलते शहर के कई इलाकों में कूड़ा नहीं उठ पाया। सड़कों, बाजारों, पार्कों और रिहायशी क्षेत्रों के बाहर कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। गर्मी बढ़ने के साथ ही इनसे उठ रही दुर्गंध ने लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल कर दिया है।
शहर में अनुमानित 1500 से 1600 मीट्रिक टन कूड़ा जमा होने की बात कही जा रही है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा लगातार बढ़ रहा है। लोगों का आरोप है कि नगर निगम की ओर से अभी तक कूड़ा उठाने के लिए कोई ठोस वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। कई स्थानों पर कूड़ा कई दिनों से पड़ा हुआ है। आवारा पशु और कुत्ते कूड़े को इधर-उधर फैला रहे हैं, जिससे हालात और बिगड़ते जा रहे हैं।
बदबू के कारण सुबह सड़कों पर पहले जैसी चहल-पहल दिखाई नहीं दे रही। शहर के रहने वाले महेंद्र सिंह ने बताया कि वह रोजाना सुबह सैर करने जाते थे, लेकिन अब सड़कों और पार्कों के आसपास फैले कूड़े के कारण बाहर निकलने से बच रहे हैं। सुबह ताजी हवा लेने के बजाय बदबू और गंदगी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे माहौल में सेहत सुधरने की बजाय बीमारी फैलने का डर अधिक है।
राजिंद्र सिंह ने बताया कि शहर के कई इलाकों में कूड़ा सड़कों तक फैल चुका है। सुबह सैर के दौरान सांस लेने में परेशानी होती है। नगर निगम को जल्द से जल्द सफाई व्यवस्था बहाल करनी चाहिए, क्योंकि लंबे समय तक कूड़ा पड़े रहने से डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। सुबह की सैर स्वास्थ्य के लिए जरूरी मानी जाती है, लेकिन मौजूदा हालात में लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
खासकर बुजुर्ग और बच्चे संक्रमण की चपेट में जल्दी आ सकते हैं। लोगों ने शासन और प्रशासन से जल्द समाधान निकालने की मांग की है। मेयर सुमन बहमनी का कहना है कि कर्मचारियों से बातचीत की जा रही है और जल्द ही सफाई व्यवस्था सामान्य करने का प्रयास किया जाएगा। जल्द ही सारा कूड़ा सड़कों से हटवा दिया जाएगा।
तेजली खेल परिसर के बाहर लगे कचरे के ढेर। संवाद