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....करते हैं दुआ बारिश में किसी की मौत न हो

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गांव मोहड़ी का वह कूड़े घर जहां बा?रिश के दिनों में ग्रामीण करते हैं अ?ंतिम संरस्कार। - फोटो : YAMUNA NAGAR
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भारतीय संस्कृति में संस्कार सम्मान व धार्मिक परंपरा अनुसार किया जाता है, लेकिन मोहड़ी गांव के लोग कूड़े के ढेर पर बने शेड के नीचे करने को मजबूर हैं। यहां सम्मान से जी तो सकते हैं, लेकिन मृत देह को सम्मान नहीं मिल पाता। मृत देह का ऐसा अपमान देखा नहीं जाता, लेकिन वह कुछ कर नहीं पा रहे हैं। सदियों से लोग इस दर्द को झेल रहे हैं, लेकिन पंचायत से लेकर अधिकारियों तक कोई ध्यान नहीं दे रहा।
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दरअसल इस गांव के लोग अंतिम संस्कार व अन्य वैदिक कर्मकांड सरस्वती नदी के किनारे करते आ रहे हैं, लेकिन बरसात के दिनों में यदि किसी की मृत्यु हो जाए, तो उन्हें कचरे के शैड में करना पड़ता है। तीन सौ मतदाता और 550 आबादी वाले इस गांवों के लोगों को अपने ही हाथों अपनों की मृत देह का अपमान करना पड़ता है। प्रदेश सरकार के मुखिया सालों से हर गांव में श्मशान घाट बनवाने की घोषणा करते आ रहे हैं, लेकिन आज तक इस गांव में श्मशान घाट नहीं बन पाया है। पंचायत, अधिकारी व प्रशासन ने इस ओर कभी ध्यान ही नहीं दिया। ग्रांट आती है और प्रयोग न हो पाने के कारण वापस हो जाती है।
आधी जमीन पर कब्जा, आधी सरस्वती नदी में : गांव मोहड़ी के पास अपना श्मशान घाट तो है, लेकिन गांव में जो भूमि श्मशान घाट के लिए पंचायत की ओर से मुहैया करवाई गई है। वह सरस्वती नदी से बिल्कुल सटी हुई है। घाट तक पहुंचने के लिए कोई रास्ता नहीं है। आधी जमीन पर गांवों के लोगों ने कब्जा किया हुआ है। कब्जे न हटाए जाने के कारण वहां लोगों द्वारा खेती शुरू कर दी गई है। वहीं घाट की जमीन सरस्वती नदी क्षेत्र में पड़ती है। इसके अलावा घाट तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है। वहां जाने के लिए खेतों की मेड़ ही सहारा एक सहारा है।
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करते हैं दुआ, बारिश में न हो किसी की मौत : यूं तो मृत्यु अटल है, इक दिन आएगी ही आएगी। लेकिन गांव मोहड़ी के लोग दुआ करते हैं कि गांव में किसी की मौत बारिश के दिनों में न हो। चूंकि नदी किनारे घाट में बारिश में संस्कार करने की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में उन्हें गांव के कचरे के ढ़ेर के शैड में अंतिम संस्कार करना पड़ता है। शनिवार को गांव के एक युवक की मौत सड़क हादसे में हो गई थी। लेकिन भारी बारिश के चलते उसका संस्कार गांव के कचरे के शैड के नीचे करना पड़ा।
ग्रांट आई और वापिस हो गई, दोबारा आई लेकिन फिर भी न बना घाट : सरकार की ओर से गांव में श्मशान घाट की चार दीवारी, शैड, पानी व अन्य जरूरी वस्तुओं के निर्माण के लिए दो साल पहले ग्रांट भेजी गई है। सरकार की ओर से दो साल पहले श्मशान निर्माण कार्यों के लिए तीन लाख रुपये भेज गए थे। लेकिन सरपंच व पंचायत की इच्छा शक्ति के आभाव में रुपये यूं ही पड़े रहे। प्रयोग न हो पाने के कारण ग्रांट वापिस ले ली गई। जिसके बाद कुछ माह पहले फिर सरकार की ओर से ग्रांट दी गई है। लेकिन अभी तक इस पर कोई काम नहीं हो पाया है।
दो पंचायतों में भी नहीं बन पाया : पहले गांव मिलक व मोहड़ी की एक ही पंचायत थी। संयुक्त पंचायत के अंतिम सरपंच गुरपाल सिंह रहे। संयुक्त पंचायत के काल से ही गांव के लोग श्मशान घाट निर्माण की मांग करते आ रहे हैं। 2016 में मोहड़ी की अपनी पंचायत बन गई। पहले सरपंच नरेश कुमार बने। उन्होंने लोगों को श्मशान घाट बनवाने का आश्वासन दिया था। लेकिन दो बार ग्रांट आने के बाद भी इच्छाशक्ति की कमी के कारण यह कार्य नहीं हो पा रहा।
जमीन पर है अवैध कब्जा, लेकिन नहीं की कोई कार्रवाई : गांव मोहड़ी सरपंच नरेश कुमार का कहना है कि पंचायत की ओर से श्मशान घाट के लिए जमीन उपलब्ध करवाई गई है। सरकार की ओर से दो साल पहले तीन लाख रुपये इसके निर्माण के लिए भी भेजे गए थे। इसकी कुछ भूमि सरस्वती क्षेत्र में आती है, जबकि बाकी जमीन पर गांव के ही लोगों ने अवैध कब्जे कर रखें हैं। अवैध कब्जे हटवाने की बात पर सरपंच नरेश ने कहा कि जल्द ही कब्जे हटवाए जाएंगे। हालांकि लोगों का कहना है कि पंचायत की ओर से अवैध कब्जे हटाने बारे न तो पंचायत अधिकारी को कहा गया और न ही इसकी शिकायत बीडीपीओ को की गई।
पंचायत अधिकारी बोले- हमें किसी ने शिकायत नहीं दी : इस बारे पंचायत अधिकारी सुशील मंगला से बात की तो उन्होंने कहा कि इस बारे उन्हें कुछ पता नहीं है। पंचायत की ओर से उन्हें इस बारे कभी अवगत नहीं करवा गया है। मोहड़ी के श्मशान घाट के लिए ग्रांट आई थी, लेकिन प्रयोग नहीं हुई तो वह वापिस हो गई। श्मशान भूमि पर अवैध कब्जे की पंचायत द्वारा कभी कोई शिकायत नहीं दी गई है। इस बारे में वह सरपंच से बात करेंगे। इस मामले को आलाधिकारियों के संज्ञान में लाया जाएगा और जरूरी कदम उठाएं जाएंगे।
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