यमुनानगर में वीरवार रात को हुई बरसात से अनाज मंडी में सड़कों किनारे
रखा हजारों टन धान भीग गया। बरसात ने जगाधरी अनाज मंडी में प्रशासन के
अधूरे इंतजाम की पोल खोलकर रख दी।
रात में तो क्या शुक्रवार दिन
में भी प्रशासन की ओर से धान को बचाने के कोई प्रयास नहीं किए गए। किसानों
ने तो खुद इंतजाम कर जैसे-तैसे धान बचा लिया, लेकिन सरकारी एजेंसियों का
धान रात भर बरसात में भीगता रहा।
हद तो तब हो गई जब बरसात के 18
घंटे बाद भी शुक्रवार को धान के कट्टे पानी में ही डूबे रहे और इनकी तरफ
किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया। इस संबंध में मार्केट कमेटी सचिव राधेश्याम
का कहना है कि इंतजाम पूरे थे। बरसात को होने से तो हम रोक नहीं सकते थे।
जो धान भीगा है वह एजेंसी का है। उससे हमारा कुछ लेना देना नहीं है।
पानी में डूबे रहे कट्टे
जगाधरी
अनाज मंडी में विभिन्न खरीद एजेंसियों ने 50 हजार के करीब कट्टे सड़कों
किनारे रखे हैं। मंडी में पानी की निकासी का कोई प्रबंध नहीं है। इससे वजह
से बरसात का पानी सड़कों पर ही जमा रहा और सड़क किनारे रखे धान के कट्टे
पानी में डूबे रहे। मार्केट कमेटी, खरीद एजेंसी, राइस मिलर्स और प्रशासन के
किसी भी अधिकारी ने इस ओर ध्यान देने की जहमत नहीं उठाई। सरकार द्वारा
खरीदा धान बरसात की भेंट चढ़ गया।
खराब हो जाएगा भीगा धान
जो
धान बरसात में भीगा है वह 24 घंटे से ज्यादा पानी में रहने से पूरी तरह से
खराब हो जाएगा। अगर धान थोड़ा बहुत गिला होता तो कुछ ज्यादा फर्क नहीं
पड़ता।
लेकिन वीरवार रात और शुक्रवार को भी धान के भीगता रहा। अगर सुबह ही धान को धूप में सुखा दिया जाता तो धान खराब होने से बच जाता।
हम नहीं करेंगे उठान
राइस
मिलर्स एसोसिएशन के प्रधान आरएस गर्ग ने बताया कि जो धान बरसात में भीगा
है उसे बचाने के प्रयास नहीं किए गए। दिन भर पानी में डूबा धान खराब हो
जाएगा।
इसमें से चावल नहीं निकलेगा। उनका कहना है कि जो धान बरसात में भीगा है उसका उठान राइस मिलर्स नहीं करेंगे। अगर राइस मिलर्स इस धान का उठान करते हैं तो उसमें सीधा नुकसान मिलर्स का ही है।
अधिकारियों से हो रिकवरी
भाकियू
ब्लाक प्रधान हरपाल सुढल का कहना है कि जो धान भीगा है। भले ही वह किसान
का न होकर सरकार का हो। किसान ने इसे छह माह की कड़ी मेहनत से तैयार किया
है। अब प्रशासन के अधिकारी इसे हफ्ता दस दिन भी नहीं संभाल पा रहे हैं। यह
उनकी नाकामी को दर्शाता है। उनका कहना है कि जो धान बरसात में खराब हुआ है
उसकी रिकवरी अधिकारियों से होनी चाहिए।
धान एजेंसी का, बचाना हमारी जिम्मेदारी नहीं
धान
को बरसात से बचाने के लिए हमारी ओर से प्रयास किए गए थे। किसी की किसान का
धान बरसात में नहीं भीगा है, जो धान भीगा है, वह एजेंसी का है। इसे बचाने
की जिम्मेदारी हमारी नहीं है।
- राधेश्याम, सचिव, मार्केट कमेटी जगाधरी