संवाद न्यूज एजेंसी
रादौर। अमावस्या तिथि का सनातन धर्म में बहुत ज्यादा महत्व है। यह पितरों को समर्पित है। पौष महीने में पड़ने वाली अमावस्या को पौष अमावस्या कहा जाता है। इसे साल की अंतिम अमावस्या भी माना जाता है। शहर के श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर के पुजारी पंडित कमलेश अवस्थी ने बताया कि पौष अमावस्या शुक्रवार, 19 दिसंबर को सुबह 04 बजकर 59 मिनट पर शुरु होगी। वहीं 20 दिसंबर को सुबह 07 बजकर 12 मिनट पर समापन होगा।
उन्होंने बताया कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करना या घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए। स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें। यह दिन पितरों की आत्मा की पूजा के लिए समर्पित है। ऐसे में दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अपने पितरों का ध्यान करते हुए जल में काले तिल मिलाकर उनका तर्पण करें।
उन्होंने कहा कि हो सके तो किसी ब्राह्मण को भोजन कराएं। ऐसा करने से पितृ दोष समाप्त होता है। उन्होंने बताया कि अमावस्या पर किए गए दान का फल कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में इस दिन काले तिल, गुड़, कंबल, वस्त्र या अनाज का दान करें। दान हमेशा किसी जरूरतमंद या गरीब व्यक्ति को ही दें।