संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के आह्वान पर जिले में 33 निजी अस्पतालों ने वीरवार को आयुष्मान योजना में इलाज बंद कर दिया। इसके नोटिस बोर्ड अस्पतालों के बाहर चस्पा या लटका दिए। ये देखकर आयुष्मान कार्ड पर इलाज कराने आए मरीज व तीमारदार उल्टे पांव घर लौट गए। गंभीर मरीजों का तीमारदारों को निजी अस्पतालों में पैसे भरकर इलाज कराना पड़ा। वहीं जिला व उप जिला नागरिक अस्पतालों में सामान्य दिनों से दस फीसदी मरीज बढ़ गए।
आईएमए से आयुष्मान भारत योजना के जिला संयोजक डाॅ. जेके गुलाटी ने बताया कि जिले में 33 निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत पात्रों का इलाज किया जाता है। इलाज का खर्च सरकार वहन करती है। इसके बिल अस्पतालों से सरकार के पास जाते हैं, पर उनका भुगतान समय पर नहीं हो रहा। किसी अस्पताल का दो-तीन तो किसी का चार-पांच माह तक भुगतान रोक कर रखा जाता है। इसी तरह दोबारा तीन से चार का अस्पतालों का भुगतान बकाया है।
यह जिले के 33 अस्पतालों को करीब 20 करोड़ बन रहा है। एक ओर बिलों का भुगतान समय से नहीं है, वहीं बिलों का भुगतान करते समय कई बार कटौती कर दी जाती है या किसी लिपिकीय गलती के कारण बिल का भुगतान रद कर जुर्माना लगा दिया जाता है। इन्हीं परेशानियों से तंग आकर निजी अस्पतालों को आयुष्मान योजना में बुधवार रात से मरीजों का इलाज बंद कर दिया है। उनकी मांग है कि समय पर अस्पतालों को बिलों का भुगतान हो। साथ ही बिलों में कटौती व उन्हें रद किया जाना बंद हो।
निजी अस्पतालों में इलाज न मिलने पर काफी मरीज व उनके तीमारदार सरकारी अस्पतालों व केंद्रों का रुख कर गए। इससे जिला नागरिक अस्पताल यमुनानगर व उप जिला नागरिक अस्पताल जगाधरी में ओपीडी व भर्ती मरीज सामान्य दिनों से दस फीसदी अधिक रहे। यहां भी कई रोगों के विशेषज्ञ न होने से मरीज व तीमारदार लौट गए। दोपहर बाद तक भी दोनों अस्पतालों में मरीजों की डॉक्टरों के कमरों, लैब व दवा खिड़कियों पर कतार रही।
इलाज न मिलने पर वापस जा रहे
ललित ने बताया कि मेरी माता को लकवे की शिकायत है। जगाधरी के निजी अस्पताल से आयुष्मान योजना के तहत इलाज चल रहा है। वीरवार को भी निजी अस्पताल आए, पर पता चला कि आयुष्मान योजना से इलाज बंद कर दिया गया है। मजबूरन अब घर लाैट रहे हैं।
जांच और दवा में परेशानी
जिला नागरिक अस्पताल पहुंचे कपिल ने बताया कि दादी को सांस लेने में समस्या है। उनकी जांच के लिए जिला नागरिक अस्पताल सुबह दस बजे से दोपहर एक बज चुका है, पहले पर्ची बनवाने फिर डॉक्टर के कमरे और अब दवा खिड़की के आगे कतार में लगे हैं।
निजी अस्पताल के बाहर लगी आयुष्मान कार्ड पर इलाज न करने की सूचना। संवाद- फोटो : 1