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Yamuna Nagar News: अभिभावकों ने एडीसी को सौंपे साक्ष्य

Fri, 10 Apr 2026 03:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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एडीसी से मिलने पहुंचे अ​भिभावक सेवा मंच के पदा​धिकारी। संवाद - फोटो : samvad
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जगाधरी। निजी स्कूलों की मनमानी, निजी प्रकाशकों की पुस्तकें लगाने, फीस वृद्धि इत्यादि को लेकर वीरवार को एडीसी नवीन अहुजा ने अभिभावकों को आरोपों के साक्ष्य देने के लिए बुलाया था। इस दौरान अभिभावक सेवा मंच के पदाधिकारी स्कूलों पर लगाए आरोपों के साक्ष्य लेकर पहुंचे। इसके लिए जिला सचिवालय में करीब दो घंटे मंथन चला। बैठक में जिला शिक्षा विभाग के अधिकारी, निजी स्कूल एसोसिएशन के पदाधिकारी व प्रतिनिधि पहुंचे थे। इस दौरान अभिभावकों ने स्कूलों पर आरोप लगाते हुए साक्ष्य एडीसी को दिए। एडीसी ने स्कूलों को अपना जवाब देने के लिए कहा है।
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अभिभावक सेवा मंच की ओर से स्कूलों की मनमानी के खिलाफ डीसी को शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद एडीसी के नेतृत्व में इस मामले की जांच की जा रही है। स्कूलों पर आरोप लगाने के बाद एडीसी ने अभिभावकों को इसके साक्ष्य देने के लिए वीरवार को बैठक बुलाई थी। इस दौरान अभिभावकों ने स्कूलों की मनमानी के खिलाफ साक्ष्य दिए। अभिभावक सेवा मंच के संजय मित्तल, नितिन गुप्ता, हर्षित कांबोज, शैंकी गुप्ता, अनुराग व अन्य पदाधिकारी एडीसी से मिले। सेवा मंच के पदाधिकारियों ने बताया कि उन्होंने फार्म-6 रूल, वर्दी का निमय, एनसीईआरटी की किताबें को लेकर शिक्षा निदेशालय की गाइडलाइन के साक्ष्य दिए। इसके साथ उन्होंने विभिन्न स्कूलों की ओर से अभिभावकों को दी जा रही किताबों की सूची व रेट लिस्ट की प्रतियां भी उपलब्ध करवाई। इस दौरान संजय मित्तल ने कहा कि बाजार में एनसीईआरटी की किताबें 65 रुपये से अधिक नहीं है। परंतु स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें लगाई जा रही है। बाजार में निजी प्रकाशकों की किताबें 500 से 600 रुपये मिल रही है। पांचवीं कक्षा की किताबों के सेट की कीमत करीब 8,000 रुपये है। वहीं, एनसीईआरटी की किताबों के सेट कीमत 350 से 400 रुपये है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में जिस कक्षा के लिए 2,400 रुपये फीस ली जा रही थी, पांच साल बाद उसकी फीस 4,800 है। स्कूलों की ओर से फीस दोगुनी कर दी गई है। उन्होंने बताया कि शिक्षा निदेशालयों के नियमों के अनुसार स्कूल के घाटे की सूरत में फीस बढ़ा सकते हैं, जबकि जिले के स्कूल हर साल मुनाफे में चल रहे हैं। बावजूद इसके फीस बढ़ा दी गई है। इसके अलावा स्कूल हर साल दो साल में वर्दी बदल देते हैं और एक ही दुकान पर इनकी वर्दियां मनमाने दामों पर मिलती हैं। अभिभावकों को एक ही दुकान से पुस्तकें खरीदने के लिए विवश किया जाता है। अभिभावकों ने इसके साक्ष्य भी एडीसी को दिए। वहीं, अब एडीसी ने निजी स्कूल प्रबंधकों से इस बारे में जवाब मांगा है।
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इस बारे में जिला शिक्षा अधिकारी प्रेमलता ने बताया कि निजी स्कूलों पर लग रहे आरोपों को लेकर वीरवार को एडीसी ने बैठक बुलाई थी। इसमें अभिभावकों ने साक्ष्य दिए हैं। विभाग की ओर से नियम व कानून के अनुसार स्कूलों के दायरे बताए गए हैं। अभी स्कूलों को इस पर जवाब देना होगा। इस दौरान जिला शिक्षा अधिकारी, प्रेमलता, जिला मौलिक शिक्षा अधिकार अशोक राणा, बीईओ सहित अन्य उपस्थित रहे।
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