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Yamuna Nagar News: पंचतीर्थी मेला आज से, पहुंचने लगे श्रद्धालु

Tue, 19 Nov 2024 02:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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अशोक कुमार
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यमुनानगर। तीर्थराज कपालमोचन मेले के चार दिन बाद मंगलवार को पौराणिक धाम पंचतीर्थी का मेला शुरू हो जाएगा। यहां भव्य मेला प्रत्येक वर्ष मार्ग शीर्ष महीने की कृष्ण पक्ष प्रतिपदा में पंचमी तिथि तक होता है। मेले के आयोजन के लिए प्रशासन की तरफ से सभी तैयारियां पूरी हो चुकी है। श्रद्धालु यहां माथा टेकने के लिए पहुंचना शुरू हो गए हैं।
दुकानें भी सज गई हैं, जहां से श्रद्धालु सामान की खरीदारी भी कर रहे हैं। यह पौराणिक धाम पंचतीर्थी जिला मुख्यालय से करीब 10 किमी. पश्चिम दिशा में स्थित है। नजदीक में रेलवे स्टेशन दराजपुर है, जो अंबाला-सहारनपुर रेलवे मार्ग पर स्थित है। यह धाम कुरुक्षेत्र भूमि की 48 कोस के परिधि क्षेत्र में पड़ता है।
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तीर्थ के महंत किशोरी शरण दास ने बताया कि पौराणिक कथा के अनुसार द्रौपदी समेत पांडव अज्ञातवास के दौरान इस स्थान पर कुछ समय के लिए ठहरे थे। पांडवों ने यहां के सरोवर में अपने अस्त्र-शस्त्र धोये थे। द्रौपदी ने यहां स्थिर दुख भंजन बेरी पर धागा बांधकर मन्नत मांगी थी और यह परंपरा शाश्वत चली आ रही है।
इस पावन सरोवर में पांच रविवार को स्नान करने से चर्म लेग व निसंतान आदि संतापों से छुटकारा मिलता है। यहां पास में राक्षी नदी बहती है, जब पांडव स्वर्गारोहण के लिए चने तक भीम की पत्नी हिडिम्बा भी उनके साथ थी, मगर युधिष्ठिर ने हिडिम्बा को व्यासपुर (आज के बिलासपुर) नामक स्थान पर अपने साथ आने से मना कर दिया, तब हिडिम्बा ने उसी समय जल बिंदू का रूप ले लिया था और नदी का साथ लेकर वापस कुरुक्षेत्र की तरफ बहती चली गई। संवाद
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पलाश के पेड़ों से घिरा था स्थान
मंदिर प्रधान मीहा सिंह, सुरेंद्र सैनी, सचिव रिखी राम, बलदेव सिंह नंबरदार, जसवंत सिंह पूर्व सरपंच व चेयरमैन, जगीर सिंह, लक्ष्मण, राम कुमार सरपंच, राजबीर, बलवान, हेमराज, सोमनाथ नंबरदार, अमन सैनी सरपंच अकबरपुर ने बताया कि यह धाम चारों तरफ से पलाश के पेड़ों से घिरा था। सन 1950 में इस धाम पर सिद्धपुरुष ब्रह्मलीन संत रामप्रिय दाम महाराज का आगमन हुआ था, उनके अथक प्रयास से यह धाम मानचित्र पर आया, उन्ही के कर कमलों से यहां सरकारी स्कूल की स्थापना करवाई गई। सन् 1977 में कुछ निर्दयी आतताइयों नेथों संत श्री राम प्रियदास जी महाराज को शहीद कर दिया। उनके पश्चात ब्रह्मलीन महात्मा गुरुशरण महाराज ने इस धाम के लिए बहुत कार्य किए थे। उनके बादत ब्रह्मलीन संत राम प्रिय दास के प्रमुख शिष्य संत किशोरी शरण महाराज इस धाम की सेवा में लगे हैं। कमेटी प्रत्येक वर्ष 5 मार्च को ब्रह्मलीन संत राम प्रिय दास महाराज की पुष्य तिथि पर अखंड भंडारे का आयोजन किया जाता है।
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