प्रदेश के राइस मिल मालिकाें ने इस बार सरकार के धान की मिलिंग करने से
हाथ खड़े कर दिए हैं। मिल मालिक धान में डैमेज की मात्रा तीन प्रतिशत से
बढ़ाकर साढ़े चार प्रतिशत करने और प्रति सौ क्विंटल धान में चावल की मात्रा
67 किलो से घटाकर 64 किलो करने की मांग कर रहे हैं।
वीरवार को प्रदेश के
राइस मिल मालिक राइस मिल एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष राजेंद्र अग्रवाल के
नेतृत्व में दिल्ली में खाद्य मंत्री प्रो. केवी थॉमस से मिले और उन्हें
धान की मिलिंग में पेश आ रही दिक्कतों के बारे में बताया।
प्रदेशाध्यक्ष
राजेंद्र अग्रवाल ने बताया कि इस बार बेमौसम बरसात के कारण धान की फसल
प्रभावित हुई है। इससे धान में काफी अधिक डैमेज निकल रहा है, वहीं प्रति
क्विंटल धान से चावल की मात्रा भी कम आ रही है।
उन्होंने बताया कि एसोसिएशन
ने प्रदेश में सर्वे कराया है, जिसके अनुसार इस बार डैमेज करीब 6 प्रतिशत
और प्रति सौ क्विंटल धान में 62 किलो चावल निकल रहा है। इसके बावजूद हम
मांग कर रहे हैं कि डैमेज की मात्रा साढ़े चार प्रतिशत और प्रति सौ क्विंटल
धान में चावल की मात्रा 67 किलो से घटाकर 64 किलो की जाए। उन्होंने कहा कि
प्रदेश में करीब एक हजार राइस मिलें हैं। इन मिलों में सरकार का 50 हजार
करोड़ का धान मिलिंग के लिए आया है।
लेकिन मिल मालिक सरकार द्वारा
निर्धारित डैमेज की मात्रा और प्रति क्विंटल धान पर चावल की उपलब्धता पर
मिलिंग करने में असमर्थ है। उन्होंने कहा कि खाद्य मंत्री ने मिल मालिकों
की मांगों को ध्यानपूर्वक सुना और इस पर सकारात्मक निर्णय का भरोसा दिलाया
है। उनके साथ एसोसिएशन के चीफ पैटर्न जयपाल जैन, प्रेस सेक्रेटरी आशीष
मेहता, राकेश चौधरी और अन्य राइस मिल मालिक थे।