संवाद न्यूज एजेंसी
साढौरा। मतदान का मौका रोजाना नहीं बल्कि पांच साल में एक बार मिलता है। इसलिए हम सभी को मतदान जरूर करना चाहिए। फिर भी काफी मतदाता ऐसे हैं जो यह सोच कर मतदान नहीं करते की उनकी एक वोट डालने से कुछ नहीं होता। जो लोग वोट नहीं देते बाद में वही सरकार की नीतियों पर सबसे ज्यादा सवाल उठाते हैं। वहीं जिस वक्त सरकार चुनने का समय था तो उन्होंने वोट नहीं दी।
अपना कर्तव्य पूरा करने का समय
गौतम भसीन का मानना है कि मतदान करना बेहद व्यक्तिगत है। यह केवल एक कर्तव्य पूरा करने के बारे में नहीं है, बल्कि वोटिंग के जरिए यह मेरे मूल्यों और विश्वास को व्यक्त करने का एक तरीका है। हर पांच साल में जब मैं वोट देता हूं तो मैं सशक्त महसूस करता हूं। अच्छा लगता है यह जानकर कि मेरी आवाज, मेरा वोट देश की दिशा तय करने में मायने रखता है। इस पर समझौता नहीं किया जा सकता।
देश को नया आकार देने का मौका
डॉ. निर्मल सिंह ग्रेवाल का कहना है कि मैं एक नागरिक के तौर पर इस जिम्मेदारी को गंभीरता से लेता हूं। मैं सुनिश्चित करता हूं कि मुझे चुनावी प्रक्रिया के बारे में जानकारी हो और मैं उसमें शामिल हो सकूं। मतदान न करना देश की दिशा पर नियंत्रण छोड़ने जैसा है। मतदान बदलाव लाने, हमारे भविष्य पर नियंत्रण करने और इसे नया आकार देने का अवसर है, जिसमें सक्रिय रूप से भाग लेना आवश्यक है।
काम को देख कर देते हैं वोट
पैक्स चेयरमैन अमरेंद्र संधू का मानना है कि लोगों की सेवा करने के लिए ईमानदारी, सहानुभूति को प्राथमिकता देना आवश्यक है। हमें ऐसे नेताओं के लिए मतदान करना चाहिए, जो ईमानदार हों और अपने मतदाताओं की जरूरतों को समझते हों। मैं किसी भी प्रत्याशी या दल को वोट करने से पहले यह देखता हूं कि उन्होंने अपने क्षेत्र के लिए क्या काम किया है, उनकी पिछली उपलब्धियां क्या रही हैं।
सक्षम हाथों में दें देश की कमान
सीए गौरव चुघ मतदान की अहमियत बताते हुए कहते हैं कि यह लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। हर नागरिक का उत्तरदायित्व है कि वह मतदान करे और देश की कमान सक्षम हाथों में दे। जो मतदान नहीं कर रहा है, वह देश की प्रगति के बारे में नहीं सोच रहा है। फिर उसे देश से जुड़ी किसी भी समस्या या तरक्की को लेकर कोई भी टिप्पणी करने का हक नहीं है, चाहे वे टैक्स ही क्यों न भरते हों।