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हिंदी बनती जा रही है वैश्विक भाषा: डॉ. बहादुर

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महाराजा अग्रसेन कॉलेज में विश्व हिंदी दिवस के उपलक्ष में वेबिनार करवाया गया। कार्यक्रम भाषा विभाग की ओर से करवाया गया। जिसमें हिंदी विभागाध्यक्ष पूर्व एसोसिएट प्रो. डॉ बहादुर सिंह ने राष्ट्रभाषा हिंदी व वर्तमान में विश्व में उसकी दशा पर व्याख्यान दिया। इस मौकेपर प्राचार्य डॉ. पीके बाजपेयी ने कहा कि बिना मातृभाषा के हर राष्ट्र गूंगा है।
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डॉ. बहादुर सिंह ने कहा कि 26 जनवरी 1950 से भारत में संवैधानिक रूप से हिंदी को राष्ट्र भाषा एवं राजभाषा के रूप में प्रचारित प्रसारित करने का प्रावधान किया है। यही वजह है कि वर्तमान में राष्ट्रभाषा हिंदी शत प्रतिशत नहीं तो कुछ मात्रा में राजभाषा बनती जा रही हैं। उदारीकरण, वैश्विकरण, बाजारीकरण और भौतिकवादी युग में हिंदी विश्व में बोली जाने वाली भाषाओं में दूसरे नंबर पर आती है। बड़ी बड़ी कंपनियों द्वारा विज्ञापन हिंदी में प्रसारित किए जा रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी करीब डेढ़ सौ से पौने दो सौ वर्ष तक विदेशी विश्वविद्यालय अपने यहां हिंदी विभागों की स्थापना कर भारतीय सभ्यता, दर्शन व साहित्य का अध्ययन व अध्यापन करवा रहे हैं। ऐसे में जहां विश्व एक ग्लोबल विलेज बनता जा रहा है ऐसे वातावरण में हिंदी भाषा भी विश्व की भाषा बनने की ओर कदम बढ़ाते जा रही हैं।
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