जठलाना। वैसे तो महिलाएं आज हर क्षेत्र में अग्रणी रहकर देश व समाज के निमार्ण में अपनी भूमिका निभा रही हैं, वहीं कृषि क्षेत्र में भी महिलाएं अपना लोहा मनवा रही हैं। गांवों से लोगों के शहर की ओर पलायन से ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों पुरुषों की अपेक्षा महिला श्रमिकों ने कृषि क्षेत्र में मोर्चा संभाला हुआ है। कृषि क्षेत्र में अगर आज ये महिलाएं किसानों के खेतों में अपनी भूमिका अदा न करें तो किसानों को अपनी सब्जी की फसलों को समेटना भारी पड़ जाएगा। महिला श्रमिकों ने बताया कि वे भीषण गर्मी में कड़ी मेहनत कर दिनभर किसान के खेतों में काम कर अपने परिवार का पालन पोषण कर रही है।
किसान ब्रजेश कुमार ने बताया कि गांव राझेड़ी में पूरा साल सैकड़ों एकड़ में सब्जी की खेती की जाती है, जिसके लिए श्रमिकों की काफी संख्या में जरूरत पड़ती है। सब्जी की फसल समेटने के लिए किसानों को श्रमिकों के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ती है। न दिनों महिला श्रमिकों ने क्षेत्र में सब्जी की फसल समेटने में मोर्चा संभाला हुआ है।
क्षेत्र में प्रतिदिन सैकड़ों महिलाएं शिमला मिर्च व टमाटर के खेतों में तुड़ाई करती दिखाई देंगी। इन महिला मजदूरों के बल पर ही सब्जी की फसल को समेटा जा सकता है अन्यथा किसान के लिए यह टेढ़ी खीर है। गांव मॉडल टाउन की महिला श्रमिकों की ठेकेदार केला देवी ने बताया कि आज कृषि क्षेत्र से हजारों महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जो दिन-रात खेतों में काम कर रही हैं।
उन्होंने बताया कि उनकी लेबर टीम में तीन दर्जन से अधिक महिलाएं हैं, जो हमेशा खेतों में मजदूरी कर अपने परिवार का पालन पोषण करती हैं। उनके क्षेत्र के कई गांव के किसानों ने इन दिनों टमाटर, शिमला मिर्च की फसल लगाई हुई है जिसकी तुड़ाई के लिए वे दूर-दूर तक जाती हैं। ताकि किसानों का काम समय पर हों और उनकी मजदूरी का कार्य चलता रहे। उन्होंने बताया कि उन्हें प्रतिदिन तीन सौ से चार सौ रुपये तक मजदूरी मिलती है। संवाद