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रादौर। कृषि विज्ञान केंद्र दामला की ओर से शुक्रवार को फसल अवशेष प्रबंधन विषय पर जिला स्तरीय किसान मेला लगाया गया। इसमें करीब 700 किसान व किसान महिलाओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान बतौर मुख्य अतिथि कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने किसानों को आत्मनिर्भर बनने व जैविक खेती अपनाने का संदेश दिया।
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उन्होंने गाय का महत्व बताते हुए कहा कि गाय का परिवार का पालन-पोषण करने के साथ खेती में भी महत्वपूर्ण योगदान है, इसलिए इसका स्थान किसान के हृदय में होना चाहिए। उन्होंने कृषि से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में भी जानकारी दी। बताया कि खेती में पानी बहुत मायने रखता है, इसलिए किसानों को जल का संरक्षित उपयोग करना चाहिए। कृषि में तकनीकियों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, जिससे कम पानी में खेती की जा सके। उन्होंने फसल अवशेष प्रबंधन का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि फसल के अवशेषों को किसान मूल्यवान उत्पाद के रूप में पहचाने और इसका प्रबंधन वैज्ञानिकों द्वारा बताई विधियों से करें। विशिष्ट अतिथि विधायक घनश्याम दास अरोड़ा ने किसानों से कहा कि वह स्वयं किसान पहले और विधायक बाद में हैं। वह स्वयं खेती का कार्य करते हैं।
उन्होंने प्राकृतिक खेती के माध्यम से कृषि उत्पादों की तरफ ध्यान आकर्षित करने का विकल्प दिया। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कुलपति प्रो. बलदेव राज कंबोज ने फसल अवशेष प्रबंधन के बारे में किसानों को तकनीकी तथ्यों के माध्यम से जागरूक किया। बताया कि किसान का खेत एक जीवंत तंत्र है, जिसमें बहुत सारे सूक्ष्म जीव, कीट व पतंगें उस तंत्र को बनाए रखते हैं। इसलिए इस तंत्र को किसान द्वारा भी बड़ी जिम्मेदारी के साथ चलना होगा। इसे चलाने के लिए सूक्ष्म जीवों के लिए भोजन अत्यंत आवश्यक है। फसल के अवशेष व कार्बनिक पदार्थ इन सूक्ष्मजीवों का भोजन होता है, जो मृदा को उर्वरता प्रदान करते हैं। इसलिए फसल के अवशेषों को आग लगाने के बारे में तो विचार बिल्कुल भी नहीं किया जाना चाहिए। अंत में कृषि विज्ञान केंद्र के संयोजक डॉ. संदीप रावल ने कहा कि किसान की समस्या के निदान हेतु कृषि विज्ञान केंद्र डोर टू डोर सेवाएं प्रदान करता रहेगा। केंद्र से प्रशिक्षित किसानों को मौके पर प्रशिक्षण से संबंधित उपकरण भी प्रदान किए गए।
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