फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Yamuna Nagar News: अब स्वयंसेवकों से एनएसएस शिविर के नाम पर नहीं करवा सकेंगे सफाई

Thu, 27 Nov 2025 01:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
विज्ञापन
छछरौली का राजकीय कॉलेज। आर्काइव
विज्ञापन
जगाधरी। महाविद्यालयों में अब राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) शिविर के नाम पर विद्यार्थियों से संस्थान व कक्षाओं की सफाई नहीं करवाई जा सकेगी। चूंकि इन कार्यों पर उच्चतर शिक्षा विभाग ने रोक लगा दी है। इसके साथ ही उच्चतर शिक्षा विभाग ने एनएसएस शिविर लगाने की नई गाइडलाइन भी जारी की है। इसके तहत अब संस्थान में शिविर लगाने से पहले अनुमति लेनी होगी। वहीं, इन शिविर में आने वाले अतिथियों को उपहार व स्मृतिचिन्ह भी नहीं दिए जाएंगे।
विज्ञापन


इसके लिए उच्चतर शिक्षा निदेशालय की ओर से दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इसके अनुसार अब संस्थानों में शिविर लगाने के लिए पहले विभाग से अनुमति लेनी होगी। वहीं, शिविर के दौरान चिकित्सकों की उपस्थिति भी रहेगी। यह शिविर केवल स्वयंसेवकों के लिए सामुदायिक सेवा, जागरूकता अभियान और सामाजिक विकास इत्यादि गतिविधियों पर आधारित होंगे। शिविर के नाम पर स्वयंसेवकों से कमरों, छत, बगीचों की सफाई, पंखों की धूल झाड़ने व पोछा लगाने इत्यादि कार्य बिल्कुल नहीं करवाए जा सकते हैं। उच्चतर शिक्षा विभाग ने एनएसएस शिविर लगाने के लिए सभी महाविद्यालयों, पॉलिटेक्निक और जिला कार्यालयों में एनएसएस को-ऑर्डिनेटरों इसके आदेश दिए हैं।
नई व्यवस्था के अनुसार अब स्वयंसेवकों को सामुदायिक सेवा, जागरूकता अभियान और सामाजिक विकास की गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करना होगा, चूंकि यही एनएसएस की मूल भावना और स्वयंसेवकों के व्यक्तित्व विकास का आधार है। आदेशों के अनुसार शिविरों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में देशभक्ति, सांस्कृतिक व प्रेरणादायक गीतों पर ही प्रस्तुति होगी। स्वयंसेवकों को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों से बचाने के लिए शिविर के दौरान चिकित्सक की उपस्थिति रहेगी। शिविरों में अतिथियों को स्मृति-चिन्ह या उपहार की अन्य वस्तुएं नहीं दी जाएगी। अतिथियों का सम्मान पर्यावरण-अनुकूल तरीकों से किया जाएगा। सभी कार्यक्रमों में कपड़े से बने बैनरों का ही उपयोग किया जाएगा।
विज्ञापन




स्वयंसेवकों के लिए यह होगा जरूरी



नए नियमों के अनुसार स्वयंसेवक को हर साल दो पौधे लगाकर उनकी देखभाल करने की जिम्मेदारी निभानी होगी। दो साल में दो बार रक्तदान करना या कम से कम पांच निरक्षर व्यक्तियों को पढ़ाना भी नए नियमों में शामिल किया गया है। वहीं, हर इकाई के कुल में से 50 प्रतिशत स्वयंसेवकों को विशेष शिविर में भाग जरूर लेना होगा। एनएसएस प्रमाणपत्र लेने के लिए स्वयंसेवकों को दो साल की सेवा पूरी करनी होगी। इसके लिए स्वयंसेवकों को महीने में दस घंटे और वर्ष कम से कम 120 घंटे कार्य करना जरूरी किया गया है। इसके अलावा सात दिवसीय विशेष शिविर में भाग लेना भी अनिवार्य होगा।

उच्चतर शिक्षा निदेशालय ने एनएसएस गतिविधियों और सात दिवसीय विशेष शिविरों संबंधी निर्देश दिए हैं। बेहतर शिक्षण वातावरण और उपयोगी गतिविधियों के लिए ये बदलाव किए गए हैं। नई गतिविधियों के जुड़ने से विद्यार्थियों को अधिक लाभ मिलेगा तथा शिविर का समग्र परिवेश बेहतर होगा।
विज्ञापन


- डॉ. सुमन भाटिया, जिला उच्चतर शिक्षा अधिकारी।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें