यमुनानगर। सढूरा गांव में जो पशुओं का जो गोबर अभी तक गांव की सुंदरता को ग्रहण लगा रहा था उससे अब लोगों के घरों में चूल्हे जलेंगे। गांव में पशुओं के गोबर से अब बायोगैस बनाई जाएगी, जिससे रसोई घरों में रखे गैस चूल्हे तीनों वक्त का भोजन और अन्य खाद्य सामग्री बनाई जाएगी। इसके गांव में गोबरधन प्रोजेक्ट के तहत गैल्वनाइजिंग ऑर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्सेज धन (गोबरधन) प्लांट लगाया गया है। जिससे गांव के घरों में बायोगैस पहुंचाई जाएगी। करीब 85 लाख रुपये से प्लांट बनकर तैयार हो चुका है। इंतजार है तो अब ट्रायल होने के बाद इसके शुरू होने का।
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत सढूरा गांव में लगे बायोगैस प्लांट की क्षमता 90 क्यूबिक मीटर गैस बनाने की है। यह प्लांट एक एकड़ से अधिक जमीन पर लगा है। प्लांट में पशुओं के गोबर व सब्जी के अवशेषों से बायोगैस बनाई जाती है।
योजना के तहत प्लांट में बायोगैस बनाने के लिए रोजाना करीब चार क्विंटल गोबर की जरूरत पड़ेगी। यह गोबर गांव के पशुपालक ही मुहैया कराएंगे। गोबर देने के बदले सरकार पशुपालकों को निर्धारित राशि मुहैया कराएगी। इसके बाद गोबर से प्लांट में बायोगैस बनाई जाएगी। फिलहाल पंचायत की तरफ से गांव के 30 घरों में अंडरग्राउंड पाइप लाइन डाल कर गैस सप्लाई करने के लिए कनेक्शन किए गए हैं। सबसे पहले 30 घरों में ही ट्रायल लिया जाएगा। इसके बाद कनेक्शन की संख्या 60 तक बढ़ाई जाएगी।
24 घंटे मिलेगी रसोई के लिए गैस:
इस प्लांट से ग्रामीणों को 24 घंटे गैस मिलेगी। इससे लोगों को गैस सिलिंडर खत्म होने की टेंशन से छुटकारा मिलेगा। प्लांट में गोबर के अलावा गाजर, गोभी या घास डाल कर भी गैस बनाई जा सकती है। यदि जरूरत पड़ी तो बायोगैस से गांव के लिए बिजली भी बनाई जा सकेगी। इतना ही नहीं गैस को सिलिंडरों में स्टोर भी किया जा सकेग। इसके लिए प्लांट में कंप्रेशर लगाने की जरूरत पड़ेगी।
खेतों में इस्तेमाल हो सकेगा वेस्ट: बलिंद्र कटारिया
स्वच्छ भारत मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक बलिंद्र कटारिया ने बताया कि प्लांट में बायोगैस बनने के बाद जो गोबर बचेगा उसे बाद में खेतों में खाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा। यह वेस्ट स्टोर करने के लिए प्लांट के पास ही बड़ा टैंक बनाया जाएगा। यह वेस्ट फसलों के लिए बहुत लाभकारी होगा। साथ ही गांव में स्वच्छता को भी बढ़ावा मिलेगा।
ग्रामीणों को जागरूक किया गया: जसविंद्र सिंह
सढूरा गांव के सरपंच जसविंद्र सिंह का कहना है गांव की आबादी करीब एक हजार है। 100 घरों में से ज्यादातर के पास पशु हैं। पशुओं के गोबर को गांव में ही सड़कों किनारे या फिर खाली प्लांटों में डाल दिया जाता था। सरकार के जब गोबरधन प्रोजेक्ट के बारे में पता चला तो उन्होंने इस बारे में ग्रामीणों को बताया। ग्रामीण इसके लिए गोबर देने को तैयार हो गए। फिलहाल जो गैस सिलिंडर बाजार में 800 रुपये का है। प्लांट से वही गैस करीब 500 रुपये की मिलेगी। इसका रेट बाद में निर्धारित किया जाएगा।
जल्द शुरू किया जाएगा प्लांट: वीरेंद्र ढुल
जिला परिषद के सीईओ वीरेंद्र ढुल का कहना है कि सढूरा गांव में बायोगैस का प्लांट लगभग तैयार हाे चुका है। घरों में कनेक्शन भी कर दिए हैं। जल्द ही इसे चलाकर ट्रायल लिया जाएगा। अभी कई और गांवों में यह प्लांट बनाने की योजना है।