संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। निजी अस्पतालों में आठ दिन से आयुष्मान योजना के तहत इलाज शुरू होने की आस में बैठे पात्रों की चिंता बढ़ गई है। आईएमए के आह्वान पर सात से 14 अगस्त तक निजी अस्पतालों में इलाज बंद था। इस बीच सरकार व आईएमए के बीच मांगों पर सहमति नहीं बन पाई। इस कारण निजी अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड पर शुक्रवार (आज) भी इलाज बंद रहेगा।
ऐसे में आयुष्मान योजना से निजी अस्पतालों में पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा के लिए पात्रों को इंतजार करना पड़ेगा। आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के आह्वान पर आयुष्मान योजना के पैनल वाले निजी अस्पतालों ने योजना पात्रों का आयुष्मान कार्ड पर छह अगस्त की रात से इलाज बंद कर दिया था। इलाज बंद किए वीरवार को आठ दिन हो गए हैं।
आईएमए के राज्य सचिव डॉ. डीके सोनी ने बताया कि आयुष्मान योजना के पैनल से जुड़े अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड पर पात्रों को इलाज किया गया। अलग-अलग अस्पतालों के कई माह के बिल बकाया है। जिले के अस्पतालों का करीब 20 करोड़ रुपये बकाया हो गया है। इसका भुगतान सरकार को करना है। उनकी मांग है कि आयुष्मान योजना के तहत समय पर अस्पतालों को बिलों का भुगतान हो।
साथ ही बिलों में कटौती व उन्हें रद्द किया जाना बंद हो। इन मांगों के लिए योजना के पैनल से जुड़े अस्पतालों में सात से 14 अगस्त तक आयुष्मान कार्ड पर इलाज बंद रखा गया। अभी भी सरकार से मांगों पर सहमति नहीं हुई है, इसलिए 15 अगस्त भी योजना के तहत निजी अस्पतालों में इलाज बंद रहेगा। आगे भी मांगों पर सहमति न होने तक इलाज बंद रखा जाएगा।
आठ दिन में अटके 150 ऑपरेशन
जिले के 33 निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत आठ दिन से इलाज व ऑपरेशन नहीं हो पाए हैं। इससे पहले हर दिन औसत 23-25 ऑपरेशन हो रहे थे, जिससे आठ दिन में 150 ऑपरेशन अटकने का अनुमान है। ये वह मरीज हैं, जो सामान्य बीमारियों के चलते निजी अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड पर इलाज शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। जिला व उप जिला नागरिक अस्पतालों में कई रोग विशेषज्ञ नहीं हैं, इसलिए योजना से जुड़े परिवार अपने गंभीर मरीजों का निजी अस्पतालों में पैसा देकर ऑपरेशन कराने पर मजबूर हैं, अन्यथा उन्हें अंबाला के सरकारी अस्पतालों और चंडीगढ़ पीजीआई ले जाना पड़ा। यह स्थिति आठवें दिन से है।
बातचीत से समाधान करें सरकार
निजी अस्पताल पहुंचे बिमलेश, सतेंद्र, गुरुजोत ने बताया कि आयुष्मान कार्ड बने हुए हैं, तब भी उन्हें अस्पताल में पैसा देकर अपने मरीज का ऑपरेशन कराना पड़ रहा है। छह दिन से निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना से इलाज बंद है, जिससे गरीब वर्ग को गंभीर बीमारियों के इलाज में परेशानी आ रही है। ऐसे में सरकार को योजना के पैनल से जुड़े अस्पतालों से बातचीत कर जल्द समस्या का समाधान निकाला चाहिए।