यमुनानगर। मंडियों में गेहूं लेकर आने वाले किसानों के लिए खरीद के लिए बनाए गए नये नियम किसानों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। गेट पास के लिए नंबर प्लेट, बायोमीट्रिक और नॉमिनी प्रक्रिया से जटिलता और बढ़ गई है।
मंडी में गेहूं लेकर आने वाली एक ट्रैक्टर-ट्राली का गेट पास काटने में कर्मचारियों को औसतन छह से सात मिनट का समय लग रहा है। यह समय तब लग रहा है, जब किसान के दस्तावेज पूरी तरह से सही होते हैं। ऐसे में जैसे-जैसे गेहूं की आवक बढ़ेगी, यह प्रक्रिया और धीमी हो सकती है।
मंडियों में जाकर गेट पास बनाने की प्रक्रिया जानी तो पता चला कि इसमें समय बहुत ज्यादा लग रहा है। यदि प्रशासन ने समय रहते व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया, तो आने वाले दिनों में मंडियों में अव्यवस्था और विरोध की स्थिति बन सकती है। गेट पास बनवाने के दौरान किसानों को इंतजार करना पड़ रहा है। कई किसान गेट पास बनाने वाले कर्मचारियों से नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। यदि कर्मचारियों की संख्या नहीं बढ़ाई गई, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
आढ़तियों के अनुसार, जिले की बड़ी मंडियों में सीजन के दौरान एक दिन में 500 से 800 ट्रैक्टर-ट्रालियां पहुंचती हैं। यदि एक ट्राली के गेट पास में छह से सात मिनट लगते हैं, तो एक घंटे में महज 10 से 12 ट्रालियों की ही एंट्री हो पाएगी। दोनों गेट पर औसतन 25 गेट पास बनेंगे। इससे मंडियों के बाहर लंबी कतारें लगना तय है। नए नियमों के तहत मंडियों में आने वाले ट्रैक्टरों पर नंबर प्लेट होना अनिवार्य किया गया है। लेकिन कई ट्रैक्टर बिना नंबर प्लेट के ही पहुंच रहे हैं। ऐसे में कर्मचारियों को खुद कागज पर स्कैच से आरसी देखकर नंबर लिखना पड़ रहा है और उसे ट्रैक्टर पर चिपकाना पड़ता है। इस प्रक्रिया में अतिरिक्त समय लग रहा है, जिससे गेट पास बनने की रफ्तार धीमी हो गई है। संवाद
जगाधरी अनाज मंडी गेहूं लेकर पहुंचे किसान की फोटो खींचता कर्मचारी। संवाद
जगाधरी अनाज मंडी गेहूं लेकर पहुंचे किसान की फोटो खींचता कर्मचारी। संवाद