यमुनानगर। जिले में शुक्रवार रात दो बार आई आंधी ने आम के पेड़ों पर कहर बरपाया है। जिससे इस बार न केवल आम उत्पादक किसानों को नुकसान हुआ है बल्कि उत्पादन पर भी बुरा असर पड़ सकता है। आंधी की वजह से पेड़ों पर आया बौर झड़ गया है। इस बार आम के पेड़ों पर अच्छा बौर आया था। जिसे देख कर लग रहा था कि इस साल आम का रिकॉर्ड उत्पादन होगा। परंतु आंधी ने आम उत्पादक किसानों की सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
जिस उम्मीद के साथ उद्यान विभाग उत्पादन बढ़ाने का प्रयास कर रहा था उसको आफत की आंधी ने मटियामेट कर दिया। हर साल बाग खरीदने वाले आम व्यापारियों पर कुदरत ने ऐसा कहर बरपाया कि लागत भी निकलने की उम्मीद नहीं बची है। हालत यह है कि व्यापारी आम के बाग निहार रहे हैं, लागत व नफा-नुकसान का आंकलन करने में जुटे हैं। एक दिन पहले तक आम के जिस बाग में पेड़ों पर बौर नजर आता था वह आंधी में झड़ गया है। महंगे दर पर आम की बाग खरीदने वाले व्यापारी अब लागत निकलने की चिंता में हैं। माना जा रहा है कि 30 से 35 फीसद फसल आंधी ने नष्ट कर दी है। सहारनपुर निवासी मेहरदीन व फैजान ने बताया कि इस बार आम के पेड़ों पर उम्मीदों से ज्यादा फल लगे थे, लेकिन आंधी ने पानी फेर दिया। पिछले साल की अपेक्षा इस साल आम की पैदावार घटेगी। फ्रूटिंग के दौरान बारिश व तूफान जैसी प्राकृतिक आपदाओं के बावजूद यमुनानगर का आम खास रहा है। बंपर पैदावार 33 हजार मीट्रिक टन की उम्मीद जताई जा रही थी। जिले में आम के बाग का रकबा करीब 16 हजार एकड़ है जोकि प्रदेश के अन्य जिलों की तुलना में सर्वाधिक है। सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाली किस्में चौसा, दशहरी व लंगड़ा यहां की खास पहचान है। इसलिए उद्यान विभाग की ओर से आयोजित प्रदेश स्तरीय मैंगो मेले में यहां के आम की धाक रहती है। बूड़िया के अलावा छछरौली व प्रतापनगर एरिया में आम के बागों की संख्या अधिक है।
ब्लॉक अनुसार रिपोर्ट मांगी है : कृष्ण कुमार
जिला उद्यान अधिकारी डाॅ. कृष्ण कुमार ने बताया कि आम उत्पादन में यमुनानगर प्रदेश में एक नंबर पर है। बाग लगाने पर सरकार की ओर से विशेष अनुदान दिया जाता है। शुक्रवार रात जो आंधी आई है उससे आम के पेड़ों पर आया बौर झड़ गया है। इसका असर आम उत्पादन पर बुरा असर पड़ेगा। किसी ब्लॉक में कितना नुकसान है इसकी रिपोर्ट मांगी गई है।