संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। पॉपुलर का हर साल बढ़ता रकबा गन्ने की फसल के लिए नुकसानदायक है। फिर भी पॉपुलर को लगाना किसानों की मजबूरी बन गया है। इसकी वजह हर साल आने वाली प्राकृतिक आपदाएं हैं। कभी बाढ़ का कहर तो कभी ओलावृष्टि और बेमौसमी तेज बारिश फसलों को नुकसान पहुंचा रही हैं। नुकसान से बचने के लिए किसानों का रुख पॉपुलर की तरफ हो रहा है।
मानसून सीजन में कई बार आई बाढ़ किसानों को काफी नुकसान पहुंचा चुकी हैं। बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान धान व गन्ने की फसल को होता है। खासकर उन इलाकों में जो खेत यमुना नदी व सोम नदी के आसपास लगते हैं। बाढ़ के पानी के साथ रेत भी बहकर आती है। जिससे धान व गन्ने की फसल रेत में दब जाती है। यमुना के साथ लगते खेतों में तो बाढ़ का पानी कई दिनों तक भरा रहता है। जिससे फसलें बर्बाद होने से किसानों को काफी नुकसान होता है। फसल बीमा होने से मिला मुआवजा किसानों को थोड़ी राहत जरूर देता है, लेकिन यह ऊंट के मुंह में जीरा के समान होता है। इस बार जिले में गन्ने का रकबा 24 हजार एकड़ को पार कर गया है।
जिले में बाढ़, ओलावृष्टि से हुआ नुकसान : वर्ष 2023 में आई बाढ़ से जिले में 24 हजार हेक्टेयर फसल को नुकसान हुआ। इस वर्ष 19 हजार 578 हेक्टेयर धान की फसल थी। इसके अलावा गन्ना, मक्का व पशु चारा भी खराब हुआ।
वर्ष 2018 में बारिश, ओलावृष्टि व जलभराव से 12 हजार एकड़ फसल बर्बाद हुई। 2021 में 17000 एकड़ और 2023 में 33 हजार एकड़ धान बर्बाद हुआ। किसानों के अनुसार धान लगाने पर प्रति एकड़ 10 हजार रुपये खर्च आता है और 25 से 30 क्विंटल धान निकलता है, जो 50 से 60 हजार रुपये की होती है। इसी तरह प्रति एकड़ गन्ना 300 से 350 क्विंटल गन्ना निकलता है जिसकी कीमत सवा से ड़ेढ़ लाख रुपये तक होती है। औसतन 40 हजार रुपये सालभर में इस पर खर्च आता है।