रादौर। शहर की यमुना गली स्थित श्रीराधा कृष्ण मंदिर में चल रही पांच दिवसीय श्रीकृष्ण कथा का शनिवार को दूसरा दिन रहा। दूसरे दिन भगवान श्रीकृष्ण जन्म व गोकुल पहुंचने की कथा सुनाई गई।
कथा व्यास आचार्य पंडित भगवती प्रसाद शुक्ल ने कहा कि जब मथुरा में कंस के अत्याचार बढ़ जाते हैं, तो भगवान के अवतार लेने का समय हो जाता है। इस दौरान आकाशवाणी होती है कि देवकी का आठवां गर्भ उसका संहार करेगा, तब कंस देवकी और वासुदेव को कारागार में डाल देता है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और घनघोर अंधेरी आधी रात में श्रीकृष्ण कारागार में जन्म होता है।
वासुदेव-देवकी के सामने चतुर्भुज रूप प्रकट करने के बाद, भगवान बाल रूप (कन्हैया) बन जाते हैं। योगमाया के प्रभाव से पहरेदार सो जाते हैं, वासुदेव जी बाल गोपाल को सूप में रखकर यमुना पार करते हैं। शेषनाग जी छत्रछाया करते हैं और वासुदेव जी कृष्ण को गोकुल में नंद बाबा के यहां यशोदा मैय्या की गोद में सुलाकर, वहां से कन्या (योगमाया) को ले आते हैं। जब गोकुल में यह समाचार पहुंचता है कि देवी यशोदा के यहां लल्ला का जन्म हुआ है, पूरा गोकुल आनंद में झूम उठता है। नंद बाबा के घर बधाई बजती है, सोने-चांदी, वस्त्र और गोदान किए जाते हैं। हर कोई कन्हैया के दर्शन के लिए वहां पहुंचने लगता है।