नगर निगम कार्यालय में कूड़ादान को पेंटिंग करते पेंटर। प्रवक्ता
यमुनानगर। स्वच्छ सर्वेक्षण–2025 के तहत स्वच्छता को लेकर नगर निगम यमुनानगर ने एक अहम और अनुकरणीय पहल की है। नगर निगम ने अपने कार्यालय को ‘जीरो वेस्ट कार्यालय’ घोषित करते हुए यह संदेश दिया है कि स्वच्छता की शुरुआत पहले अपने कार्यस्थल से होनी चाहिए। इस अभियान की शुरुआत नगर आयुक्त महाबीर प्रसाद के नेतृत्व में निगम कार्यालय परिसर से की गई।
इस पहल के अंतर्गत नगर निगम के प्रत्येक शाखा कार्यालय और कमरे में दो प्रकार के डस्टबिन—गीला और सूखा—रखवाए गए हैं, ताकि कचरे का स्रोत पर ही पृथक्करण सुनिश्चित किया जा सके। स्वच्छ भारत मिशन की नगर निगम टीम ने सभी शाखाओं में जाकर कर्मचारियों को गीले और सूखे कूड़े को अलग-अलग डस्टबिन में डालने के लिए जागरूक किया। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया कि प्रतिदिन सभी शाखाओं से निकलने वाले कचरे को एकत्रित कर उसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण हो।
गीले कचरे के निस्तारण के लिए नगर निगम ने परिसर में ही अनुपयोगी सामग्री का उपयोग कर कंपोस्टर का निर्माण कराया है। इस कंपोस्टर के माध्यम से जैविक खाद तैयार की जा रही है, जिसका उपयोग नगर निगम परिसर में लगाए गए पौधों में किया जा रहा है। इससे न केवल कचरे का सही निस्तारण हो रहा है, बल्कि परिसर में हरियाली भी बढ़ रही है। वहीं, सूखे कचरे को अधिकृत रिसाइकलर को सौंपा जा रहा है, जिससे रिसाइक्लिंग को बढ़ावा मिल सके। इस अभियान में सुदर्शन फाउंडेशन ने भी सहयोग किया। फाउंडेशन की ओर से वेस्ट सामग्री से कंपोस्टर तैयार किया गया, साथ ही नगर निगम परिसर में 101 फूलों वाले पौधों का रोपण भी किया गया।
नगर आयुक्त महाबीर प्रसाद ने कहा कि स्वच्छता केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि हर कार्यालय और संस्थान अपने परिसर से निकलने वाले कचरे का निस्तारण स्वयं करे, तो शहर को स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सकता है। अतिरिक्त नगर आयुक्त धीरज कुमार ने कहा कि जीरो वेस्ट की दिशा में यह एक नवाचारी और स्थायी कदम है। स्वच्छ सर्वेक्षण–2025 के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए सभी कार्यालयों, संस्थानों और थोक कचरा उत्पादकों को कचरा पृथक्करण और निस्तारण को अपनी कार्य संस्कृति का हिस्सा बनाना चाहिए। स्वच्छ शहर ही स्वस्थ भविष्य की मजबूत नींव है।