संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। शहर में करीब 55 हजार बेनामी और लंबे समय से खाली पड़े प्लॉट अब आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बनते जा रहे हैं। इन भूखंडों पर न तो निर्माण कार्य हुआ है और न ही मालिकों की ओर से कोई देखरेख की जा रही है। नतीजतन, ये प्लॉट धीरे-धीरे कूड़े के ढेर में तब्दील हो रहे हैं। कई स्थानों पर हालात इतने खराब हैं कि आसपास रहने वाले लोगों का जीना दूभर हो गया है।
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार बड़ी संख्या में ऐसे प्लॉट हैं, जिन्हें खरीदने के बाद मालिक या तो विदेश चले गए या फिर किसी अन्य जिले या राज्य के रहने वाले हैं। इस मामलों में निगम के पास प्लॉट मालिकों का स्थायी पता तक उपलब्ध नहीं है। इससे कार्रवाई में भी दिक्कत आ रही है। वहीं पार्षद जयंत स्वामी, विक्रम राणा व प्रियांक शर्मा का आरोप है कि खाली प्लॉटों में आसपास के लोग कूड़ा डाल जाते हैं, जिससे बदबू और गंदगी फैलती है।
बरसात के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। खाली पड़े इन प्लॉटों में पानी भर जाता है, जो लंबे समय तक जमा रहता है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इस तरह का ठहरा हुआ पानी मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करता है। इससे डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों के फैलने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
पिछले वर्षों में कई वार्डों में डेंगू के मामले सामने आने के बाद भी इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। वहीं अधिकारियों ने ऐसे प्लॉट मालिकों की पहचान करने के लिए पार्षदों का भी सहयोग मांगा है, क्योंकि 55 हजार लोगों को नोटिस जारी करना नगर निगम अधिकारियों के लिए भी इतना आसान नहीं है।
नगर निगम के जेटीओ अजय वालिया कहना है कि शहर में करीब 55 हजार खाली प्लॉट हैं। काफी लोग प्लॉट खरीद कर छोड़ देते हैं या फिर दूसरे जिलों व राज्यों के लोग भी प्लॉट खरीदने के बाद वापस चले जाते हैं। पार्षदों की मांग पर यह तय किया गया है कि खाली प्लॉटों पर नोटिस चस्पाया जाए। प्लॉट मालिकों को निर्देश दिए जाएंगे कि वे या तो अपने भूखंड की चहारदीवारी कराएं या निर्माण कार्य शुरू करें। पालन न करने पर जुर्माना और अन्य कार्रवाई भी की जा सकती है।
निगम सदन की बैठक में भी उठा था मामला
नगर निगम सदन की बैठक में 24 फरवरी को भी यह मुद्दा जोर-शोर से उठा। पार्षदों ने अधिकारियों से वार्ड वार खाली प्लॉटों की संख्या, अब तक जारी किए गए नोटिस और की गई कार्रवाई का ब्यौरा मांगा। कई पार्षदों ने आरोप लगाया कि निगम की ढिलाई के कारण समस्या विकराल रूप लेती जा रही है। उन्होंने मांग की थी कि ऐसे प्लॉट मालिकों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं।