फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जीवन जीने के सूत्र प्रदान करतीं हैं मां सरस्वती : सुयशा

Mon, 03 Feb 2025 12:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन



जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में रविवार को साप्ताहिक सत्संग हुआ। आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी सुयशा भारती ने प्रवचन के दौरान बताया वसंत पंचमी का पर्व विद्या और ज्ञान की देवी मां सरस्वती के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना तो कर दी, लेकिन संपूर्ण सृष्टि लयबद्ध नहीं हुई।
तब ब्रह्मा जी ने तप से मां सरस्वती को प्रकट किया। मां सरस्वती ने अपनी वीणा के संगीत से सृष्टि को लयबद्ध चक्कर में बांध दिया। मां सरस्वती का स्वरूप हमें जीवन के सूत्र प्रदान करता है। मां का श्वेत शृंगार जीवन की पावनता व श्रेष्ठ आचरण को दर्शाता है। मां सरस्वती का वाहन हंस है और हंस विवेक व ज्ञान का प्रतीक है।
विज्ञापन

मां सरस्वती के हाथों की वीणा हमें मधुरता से जीवन जीने का संदेश देती है। एक साधक जो तप व त्याग के मार्ग पे चलता है, उसका आचरण शुद्ध व परम पावन हो जाता है। जो अपने जीवन को वीणा की तारों की तरह साध लेता है, उसी का जीवन संतुलित व सधा होता है। ब्रह्मनिष्ठ गुरु से ज्ञान की प्राप्ति के बाद ही हमारे भीतर विवेक जागृत होता है।
विज्ञापन

जब एक साधक निरंतर ज्ञान की ध्यान साधना करता है, तभी वह उन गहन सूत्रों को पकड़ पाता है जो हमारे पर्व व त्योहार प्रदान करते हैं। बिना विवेक व ज्ञान के मनुष्य केवल बाहरी रूप से ही पर्व मनाकर कुछ क्षणों की प्रसन्नता प्राप्त करता है, लेकिन वह उन अनमोल सूत्रों से वंचित रह जाता है जो हमारे जीवन में दैवीय परिवर्तन घटित करने में सहायक होते हैं। साध्वियों ने भजनों से गुरु व ईश्वर की महिमा का गुणगान किया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें