नवरात्र शुरू होते ही लोग देवी स्थलों व मंदिरों में दर्शनों व पूजन के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से एक जिले के बिलासपुर के भगवानपुर गांव का प्राचीन मंत्रा देवी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, जो गांव में लगती शिवालिक की पहाड़ी पर 150 मीटर ऊंचाई पर है। यहां मंदिर में मां चंडी रूप में विराजमान है। मंदिर समिति के पदाधिकारियों की माने तो यह माता मंत्रा देवी का विश्राम स्थल है। जहां हर साल चैत्र व शारदीय नवरात्र पर हरियाणा सहित पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार भी यहां शारदीय नवरात्र को लेकर मंदिर में श्रद्धालुओं को कतारबद्ध तरीके से मां के दर्शन कराने व पूजन सहित भंडारे के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं।
श्री माता मंत्रा देवी मंदिर समिति के प्रधान डॉ. बरखा राम ने बताया कि मंदिर परिसर में 26 वर्षों से नवरात्र के अवसर पर अष्टमी को भंडारा लग रहा है। भंडारे की शुरुआत में एक हजार लोग थे, पर बीते एक दशक से अष्टमी के भंडारे में करीब पांच हजार श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। इस बार भी अष्टमी पर 22 अक्तूबर को सुबह 11.30 से शाम पांच बजे तक भंडारे में कढ़ी, चावल, पूरी, आलू-छोले, कद्दू, जलेबी व चाय का प्रसाद वितरित होगा। इसमें क्विंटलों खाद्य व पेय सामग्री लगेगी। इन पर आने वाला सारा खर्च मंदिर समिति सहित गांव के लोग और श्रद्धालु मिलकर करते हैं।
मंदिर में लगातार 22 वर्षों से देसी घी की अखंड ज्योति जल रही है। अखंड ज्योति सहित मंदिर परिसर में माता मंत्रा देवी, ललिता देवी, भगवान शिव व हनुमान मंदिर के सेवा व पूजन कार्यों में पुजारी लगे हैं। मंदिर के रास्ते ध्यानु भगत का मंदिर भी है। प्रधान डॉ. बरखाराम ने बताया कि अष्टमी पर भंडारे से पूर्व यहां कन्या पूजन भी विशेष अंदाज में होता है। मंदिर में जितनी भी कन्याएं पहुंचती हैं, उनका बैंड बाजे के साथ स्वागत व पूजन होता है। उन्हें भोजन कराने के साथ चुनरी व अन्य उपहार भी दिए जाते हैं। इस तरह करीब 150 कन्याओं का पूजन होता है।