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Yamuna Nagar News: दो माह बाद मानसून की दस्तक, नाले नाप रहे अफसर

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विश्वकर्मा चौक समीप गंदगी से अटा नाला।
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नगर निगम अफसरों की मानसून को लेकर तैयारी अभी तक कागजों में ही है, क्योंकि धरातल पर गंदगी से अटे नालों की सफाई का काम नहीं लग पाया है। हालांकि जिला प्रशासन की ओर से 15 जून तक तीन चरणों में नाले साफ करने का लक्ष्य रहता है, पर हर बार की तरह इस बार भी काम शुरू करने में अफसर देरी कर रहे हैं, जो अभी तक टेंडर तो दूर उसके एस्टीमेट तैयार करने को नाले नापने में ही लगे हैं। यानी तैयार एस्टीमेट पर मंजूरी से लेकर टेंडर प्रक्रिया पूरी होने में ही एक से डेढ़ माह लग सकते हैं।
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ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि 15 जून तक नाले कैसे साफ होंगे?, वहीं डेढ़ माह में टेंडर सिरे चढ़ते भी हैं तो काम के बीच मानसून खलल बनेगा। इस पर वार्डों के पार्षद नालों की सफाई के ठेके पर करोड़ों रुपये बर्बादी की आशंका जता रहे हैं। साथ ही यह काम नगर निगम को अपने कर्मचारियों व संसाधनों से कराने की मांग कर रहे हैं।


नालों की सफाई के लिए निगम अफसरों ने गत वर्ष की तरह शहर को दो जोन में बांटा है। दोनों जोन में काम पर सवा करोड़ खर्च का अनुमान तैयार हैं। इस पर टेंडर करने को मंजूरी का इंतजार है। बता दें कि गत वर्ष में जोन-1 में जगाधरी के वार्ड-1 से सात के 28.5 किमी. के 12 नालों की सफाई का 45 लाख और जोन-दो में यमुनानगर के वार्ड-8 से 22 के 63.5 किमी. के 27 नालों की सफाई का 70 लाख में ठेका किया था। इस बार जोन-1 में करीब 65 लाख और जोन-2 में करीब 70 लाख खर्च का अनुमान है।
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वार्ड-तीन से पार्षद हरमीन कोहली, चार से देवेंद्र सिंह, पांच से विनय कांबोज, सात से रामआसरा भारद्वाज, आठ से विनोद मरवाह, 13 से निर्मल चौहान ने कहा कि अभी नालों की सफाई के टेंडर में निगम अफसर देरी कर रहे हैं, वहीं मानसून से ऐन पहले भी खानापूर्ति कर दी जाएगी। हर साल ऐसा हो रहा है। यह जनता के दिए टैक्स से जुटाया सरकार धन बर्बाद करने जैसा है, इसलिए यह काम पूरे साल नगर निगम को अपने कर्मचारियों व संसाधनों से कराना चाहिए। जिससे हर साल नालों की सफाई पर लगने वाले एक से डेढ़ करोड़ रुपये बचेंगे और यही धन नालों की सफाई के लिए संसाधन खरीदने सहित शहर के विकास कार्यों पर लग सकेगा।

नालों की सफाई के टेंडर के लिए एस्टीमेट तैयार है, जिन पर अंतिम निर्णय लेकर मंजूरी ली जाएगी। तब टेंडर होंगे। प्रयास रहेगा जल्द टेंडर प्रक्रिया पूरी कर यह काम शुरू कराया जाए।
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- हरजीत सिंह, सीएसआई, नगर निगम।
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