संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। राइस मिलर्स एसोसिएशन ने बैठक कर गीला धान लेने से मना कर दिया है। हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन का कहना है कि धान की बोरी एक बार बारिश में गीली होने के बाद उससे सही व साफ चावल निकालना असभंव है। इससे मिलर्स को करोड़ों रुपये का नुकसान होगा।
बसंल ने कहा कि वर्ष 2002 में सीजन में बारिश होने पर तत्कालीन सरकार ने उस वर्ष के लिए मिलर्स व किसानों को राहत पहुंचाने के लिए विशेष पैकेज जारी किया गया था। जिसमें निकासी की मात्रा को कम किया गया था व डैमेज व बदरंग प्रतिशत को बढ़ाया गया था। मौजूदा बारिश से हुए नुकसान के हालात को देखते हुए ऐसे की विशेष पैकेज की आवश्यकता है।
परंतु सरकार ने किसानों, आढ़तियों व मिलर्स को राहत प्रदान करके के लिए कोई कदम नहीं उठाया है। जिला प्रधान मनीष बंसल ने कहा कि सरकार को मिलर्स की समस्या को देखते हुए राहत पैकेज जारी करना चाहिए। दो दिन बारिश से मंडी में हजारों क्विवंटल धान भीग गया है। इसका सीधा नुकसान आढ़तियों व मिलर्स को हो रहा है। पानी में डूबी बोरियाें को बदल बदल कर सुखाना पड़ रहा है।
गीला धान सुखाने में अतिरिक्त लेबर खर्च करनी पड़ रही है। धान गीली होने से सूखने में कई दिन लगेंगे, जिससे धान सड़ व काली पड़ जाएगी। इस धान से मिलर्स को चावल निकालने में दिक्कत होगी। मिलर्स ने सरकार से मांग की है कि प्रति क्विंटल चावल की निकाली को 67 प्रतिशत से कम करके 64 प्रतिशत किया जाए, चूंकि गीली धान से चावल की पूरी मात्र नहीं निकलेगी।
प्रधान संदीप कुमार ने कहा कि बारिश से आढ़तियों व किसानों को भारी नुकसान हुआ है। मंडी में आए धान को सुखाने में आढ़तियों को भारी मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है। आढ़तियों पर अतिरिक्त लेबर खर्च पड़ रहा है। उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि मंडी में धान पूरी तरह से सूखा कर लेकर आए। मंडी में 17 प्रतिशत नमी के धान की खरीद की जाएगी।