यमुनानगर। कई दिन की चिलचिलाती धूम व गर्मी के बाद मौसम ने अचानक करवट ली, जिससे लोगों को तो गर्मी से राहत मिली, मगर किसानों के लिए फिर आफत आ गई है। मंगलवार देररात आई आंधी के बाद बुधवार सुबह से ही आसमान में छाए हुए थे।
बुधवार शाम को फिर तेज अंधड़ के साथ बूंदाबांदी शुरू हो गई। उधर, बुधवार दिन में खुशनुमा मौसम के चलते बाजार व मुख्य सार्वजनिक स्थल लोगों की मौजूदगी से गुलजार नजर आए। मौसम का मजा लोगों ने छतों, पार्कों, बगीचों में उठाया। धूप न निकलने व हवा चलने से तापमान में भी छह डिग्री तक गिरावट दर्ज की गई। इस दौरान अधिकतम तापमान 28 डिग्री दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम पारा 21 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़का।बुधवार शाम को बूंदाबांदी हुई। मौसम विभाग ने तीन दिन तक बारिश की संभावना जताई है।
इसे लेकर कृषि विभाग ने किसानों को एडवाइजरी भी जारी की है। कृषि उप निदेशक प्रदीप ने बताया कि बारिश का गेहूं पर असर पड़ेगा जबकि गन्ना बिजाई पर इसका कोई असर नहीं होगा। उन्होंने बताया कि जिले का कुछ रकबा कटाई का शेष है। परंतु बारिश से कटाई में परेशानी होगी। वहीं आधी से पौधे गिरने से नुकसान होगा।
उठान न होने से अटी मंडी, बारिश में भीगी गेहूं
जगाधरी। जिले की मंडियों में गेहूं की आवक तेजी पर है, जबकि उठान बेहद धीमा है। जिसके चलते मंडियां गेहूं की बोरियों से अटी पड़ी हैं। प्रशासन की ओर से उठान में ढिलाई न बरतने के आदेश दिए गए हैं, परंतु यह आदेश हवा हवाई नजर आ रहे हैं। लघु सचिवालय जहां जिले के तमाम बड़े प्रशासनिक अधिकारी बैठते हैं। उसी के सामने स्थित अनाजमंडी में ही बुरा हाल है। जगाधरी अनाजमंडी में करीब 50 हजार गेहूं की बोरियां पड़ी हैं। बुधवार को थोड़ी देर की बारिश से सैकड़ों गेहूं की बोरियां भीग गईं। मौसम को लेकर वैज्ञानिकों व कृषि विभाग की ओर से पूर्व में ही जानकारी दी गई थी। उसके बावजूद गेहूं को भीगने से बचाने का प्रबंध नहीं किया गया।
हालांकि मंडी में अनाज रखने के लिए शेड है, लेकिन उठान न होने के कारण शेड के नीचे गेहूं रखने की जगह ही नहीं बची है। फड़ पर भी गेहूं की बोरियां पड़ी हैं। हालत यह है कि अब फड़ों पर भी जगह नहीं बची है। जिस कारण मंडी की सड़क व डिवाइडर पर बोरियां रखनी पड़ रही हैं। वहीं पहले से जानकारी होने के बावजूद गेहूं भीगने से बचाने के लिए तिरपाल इत्यादि का बंदोबस्त नहीं किया गया।
दूसरी तरफ मंडी में गेहूं लेकर आने वाले किसानों को भी चिंता सताने लगी है। चूंकि वे कटाई के बाद गेहूं लेकर मंडी पहुंच गए हैं, लेकिन फसल डालने के लिए जगह नहीं है। ऐसे में किसान ट्रॉलियों में ही गेहूं रखने पर मजबूर हैं। ऐसे में यदि बारिश होती है, तो उनकी फसल भी भीग जाएगी। मंडी पहुंचे तरसेम, अमरनाथ, आज्ञाराम, रामकुमार, प्रकाशचंद ने बताया कि बारिश से उन्हें फसल भीगने का डर सता रहा है। यदि मंडी में पड़ी उनकी फसल भीग गई तो सूखने में वक्त लगेगा और मूल्य में कटौती होगी।
मंडी में नियमित रूप से उठान किया जा रहा है। कुल आवक का 75 प्रतिशत उठान किया जा चुका है। मौसम खराब होने पर उन्होंने मंडी का निरीक्षण किया था। अधिकारियों को उठान में और तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। जल्दी ही शत प्रतिशत उठान कर लिया जाएगा। मंडी में गेहूं नहीं भीगी है।
अशोक कुमार, जिला खाद्य आपूर्ति एवं नियंत्रक।