संवाद न्यूज एजेंसी
साढौरा। माघ पूर्णिमा पर 144 साल बाद महासंयोग बन रहा है। महाकुंभ स्नान पर पांच शुभ योग, सौभाग्य योग, शोभन योग, शिव वास योग, गजकेसरी योग, त्रिग्रही योग बनेंगे। इसलिए इस पूर्णिमा का महत्व कई गुना बढ़ गया है। यह जानकारी पंडित रामराज कौशिक ने दी।
उन्होंने बताया कि पूर्णिमा शुभ तिथि मानी जाती है जो हर महीने में एक बार आती है। इस दिन भगवान विष्णु की उपासना करनी चाहिए। सत्यनारायण की कथा करने का विधान भी है। माघ मास की पूर्णिमा तिथि को माघ पूर्णिमा का व्रत रखा जाता है। इस तिथि पर स्नान, दान और जप को बहुत पुण्य फलदायी बताया गया है। इस बार माघ पूर्णिमा 12 फरवरी को है।
पूर्णिमा तिथि 11 फरवरी को शाम 6 बजकर 55 मिनट पर शुरू होगी। तिथि का समापन 12 फरवरी को शाम 7 बजकर 22 मिनट पर होगा। उदय तिथि के अनुसार, माघ मास की पूर्णिमा का व्रत 12 फरवरी को होगा। स्नान-दान का समय सुबह 5 बजकर 19 मिनट से सुबह 6 बजकर 10 मिनट तक है।
पंडित रामराज कौशिक ने बताया कि धर्म ग्रंथों में माघ पूर्णिमा को स्नान-दान का पर्व बताया है। पूरे साल के पूर्णिमा स्नान में माघ पूर्णिमा स्नान को सबसे उत्तम कहा गया। माघ की पूर्णिमा पर तीर्थ के जल में भगवान विष्णु का निवास होता है। साथ ही इस दिन तिल दान करने से कई यज्ञ करने जितना पुण्य फल मिलता है।
माघ पूर्णिमा का महत्व
पंडित रामराज कौशिक ने बताया कि ग्रंथों में माघ को भगवान भास्कर और श्री हरि विष्णु का महीना बताया गया है। मान्यता है कि माघ पूर्णिमा पर भगवान विष्णु गंगाजल में निवास करते हैं। इस दिन जो भी श्रद्धालु गंगा स्नान करते हैं। उसके बाद जप और दान करते हैं। उन्हें सांसारिक बंधनों से मुक्ति मिलती है। बुधवार को श्रद्धालु सूर्योदय के साथ ही तीर्थ स्थानों पर नदियों में स्नान करेंगे और चंद्रमा और धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा करेंगे तो उन्हें सुख-समृद्धि मिलेगी। माघ पूर्णिमा पर रात में चंद्रमा की पूजा करने से चंद्र दोष दूर होता है। बुधवार को कुंभ संक्रांति है। इस दिन सूर्य देव कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे। इस पर्व में यज्ञ, तप और दान का विशेष महत्व है। स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा, पितरों का श्राद्ध और जरूरतमंद लोगों को दान करने का विशेष फल है। जरूरतमंद को भोजन, वस्त्र, तिल, कंबल, गुड़, कपास, घी, लड्डू, फल, अन्न, पादुका आदि का दान करना चाहिए।