दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान में बेटी बचाओ का संदेश देती लड़कियां। प्रवक्ता
जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में लोहड़ी के पर्व पर संतुलन नामक प्रकल्प की ओर से जन जागृति के लिए महोत्सव का आयोजन किया गया। इस दौरान बच्चों ने नृत्य एवं नाटक के मंचन से समाज में नर नारी के कर्तव्यों एवं अधिकारों के संबंध में लोगों को जागरूक किया किया।
इस अवसर पर साध्वी ने कहा कि हम सभी प्रकृति एवं परमात्मा की संतान हैं, फिर क्या कारण है कि हम पुत्र जन्म पर तो बधाइयां देते हैं लेकिन पुत्री के जन्म पर माता-पिता को सांत्वना देते हैं। नर एवं नारी का कार्यक्षेत्र स्वयं प्रकृति ने निर्धारित किया है, किंतु हम अपनी भ्रमित बुद्धि एवं अहंकारी प्रवृति द्वारा उनके कार्यक्षेत्र में हस्तक्षेप करने की बहुत बड़ी भूल करते हैं जिसका परिणाम आज के परिपेक्ष्य में स्पष्ट रूप से हमारे सम्मुख आ रहा है।
उन्होंने कहा कि नारी को भारतीय सनातन परंपरा में सदा ही देवी, अर्धांगिनी, जननी एवं अन्नपूर्णा जैसे नामों से विभूषित किया गया है। यदि विचार करें तो ये सभी नाम नारी के गुणों एवं कर्तव्यों को भी परिभाषित करते हैं। किंतु आज आधुनिकता के नाम पर नारी अपनी वास्तविक पहचान भुलाकर एक अंधी दौड़ में सम्मलित हो रहीं हैं जिसमें वह अपनी दिव्यता, गरिमा एवं सम्मान को ताक पर रखकर स्वतंत्र होने के प्रयास में है। अपने कर्तव्यों को बोझ मानकर मनमाना आचरण करने के लिए समाज में उतरना स्वतंत्रता नहीं अपितु स्वच्छंदता है जिसका अंतिम परिणाम केवल पीड़ा एवं पश्चाताप ही होता है। समाज में पुनः नारी का स्थान पूजनीय हो इसके लिए प्रत्येक नारी को ब्रह्मज्ञान द्वारा अपनी वास्तविक पहचान प्राप्त करके गरिमायुक्त होकर अपने आचरण एवं व्यवहार को दिव्य एवं पूजनीय बनाना होगा। जहां नारी अन्नपूर्णा होकर संसार का भरण पोषण करती है वहीं चंडी रूप धारण कर के अन्याय को मिटाने का सामर्थ्य भी नारी के भीतर है। नर-नारी दोनों ही जब आध्यात्मिक रूप से जागृत होकर समाज में अपने कर्तव्यों का वहन पूरी ईमानदारी एवं निष्ठा से करेंगे तभी एक सुंदर समाज का निर्माण हो पाएगा।
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान में बेटी बचाओ का संदेश देती लड़कियां। प्रवक्ता