यमुनानगर। लोगों को बेहतरीन सेवाएं देने के लिए सिविल अस्पताल को भले ही सम्मान मिला है, लेकिन यहां सुविधाओं का टोटा है। या यूं कहिए कि अभावों में यहां लोगों का आना कम हो गया है। जहां भीड़ ही नहीं होगी वहां अव्यवस्था भी नहीं होगी। ऐसे में बेहतरीन कार्य का दावा करना बेमानी लगता है। जबकि सिविल अस्पताल में मिलने वाली सुविधाओं की जमीनी हकीकत ही कुछ ओर है। हालात ऐसे है कि कुछ सुविधाएं नहीं है, तो कुछ मशीनें हैं पर कर्मचारी नहीं है। ऐसे में लोगों को मजबूरन निजी अस्पतालों के धक्के खाने पड़ रहे हैं। कुछ मशीने काफी समय से खराब पड़ी है, प्रबंधन ठीक करवाने की जहमत नहीं उठाता। कोरोना संक्रमण के कारण पहले ही लोग आर्थिक बोझ के तले दबे गए हैं। ऐसे में उन्हें इलाज व टेस्ट के लिए मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है। शहर के जिला व उप जिला अस्पताल में कहने को तो करोड़ों की मशीने हैं, लेकिन लोगों को इसकी सुविधा नहीं मिल पा रही है। अस्पताल में मशीन खराब पड़ी है या विशेषज्ञ न होने से सेवा नहीं मिल पा रही है। सिविल अस्पताल में एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, ईसीजी, सीटी स्कैन, ई-को, दांत एक्स-रे सहित अन्य कई लाखों रुपये की मशीनें हैं। इसमें से अधिकांश का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। वहीं कुछ कोरोना गाइड के कारण सिर्फ आपात स्थिति में ही प्रयोग में लाई जाती है। सुविधाएं न मिलने से परेशान लोगों ने कहा कि यदि मशीनों का प्रयोग ही नहीं किया जाना और लोगों को निजी रूप से ही टेस्ट करवाने हैं, तो मशीनें किसी अन्य संस्थान को देदें, ताकि इसका प्रयोग किया जा सके।
शौचालय में पड़ी है ईको मशीन
सिविल अस्पताल की ईको मशीन काफी समय से प्रयोग नहीं की जा रही है। हालात यह है कि यह पड़े पड़े खराब हो गई। ऐसे में इसे खुले में रख दिया गया है, जहां कोई भी इससे छेड़छाड़ कर सकता है। ट्रामा सेंटर में ईका मशीन शौचालय के बाहर पड़ी है। इसके साथ ही पानी की टंकी पड़ी रख हुई। सामने शौचायल है। इसे पर धूल तो चढ़ी ही है, वहीं मकड़ी के जाले तक लग गए हैं। ऐसे में यदि ऑपरेटर मिल भी अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण इस मशीन का प्रयोग नहीं किया जा सकेगा। वहीं अगर खराबी की बात करें तो इसका एक मामूली सा फॉल्ट टीक करने में करीब 20 हजार रुपये तक का खर्च आ जाता है।
हृदय रोगियों को मिल रहे धक्के
सिविल अस्पताल में कोई हदृय रोग विशेषज्ञ नहीं है। हृदय रोग का एक टेस्ट हजारों रुपये में होता है। ऐसे में लोगों को टेस्ट की सुविधा मिलने से काफी राहत मिलती। परंतु दुष्प्रबंधन के कारण मशीन खराब हो गई। ऐसे में हृदय रोगी निजी लैब व सेंटर से टेस्ट करवाने को मजबूर हैं। वहीं वरिभाग के पास हृदय रोगियों का कोई आंकड़ा नहीं है। जबकि हर साल विश्व हृदय दिवस मनाया जाता है। शहर के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुज कांबोज ने बताया कि भारत में हर चौथा व्यक्ति दिल की किसी न किसी बीमारी से प्रभावित है। वहीं यदि जिले की बात करें तो करीब डेढ़ लाख लोग दिल की छोटी से लेकर गंभीर बीमारी से पीड़ित है। हृदय रोगों के इलाज में ईको मशीन का सबसे अहम उपयोग होता है। इससे मरीज की हृदय गति का पता लगाया जाता है।
अल्ट्रासाउंड मशीन खराब, न ही ऑपरेटर
सिविल अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन करीब दो साल से खराब पड़ी है। मशीन ठीक करवाना तो दूर इसका ऑपरेटर भी निकाल दिया गया है। चूंकि ऑपरेटर ठेके पर रखा था। ऐसे में सबसे ज्यादा परेशान गर्भवतियों को होती है। पहले सिविल अस्पताल में प्रसव होता था, उस समय गर्भवतियों को बाहर से अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ता था। अब इमारत निर्माण के चलते सभी प्रसव मामले जगाधरी ट्रांसफर कर दिए गए हैं। जिस कारण वहां पर अव्यवस्था फैल गई है।
इसे लेकर सिविल सर्जन डॉ. विजय दहिया को अलग अलग समय पर सात बार मोबाइल पर कॉल की गई। परंतु उन्होंने फोन नहीं उठाया। वहीं उनके मोबाइल पर दो एसएमएस भी भेजे गए, बावजूद इसके बात नहीं हो पाई। इसके बाद शाम को उन्होंने अपना मोबाइल बंद कर दिया।