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प्रेम हृदय का सर्वश्रेष्ठ भाव : सुमान्या भारती

Mon, 20 Apr 2026 12:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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व्यासपुर में सत्संग सुनते श्रद्धालु। प्रवक्ता
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संवाद न्यूज एजेंसी
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व्यासपुर। प्रेम वह दिव्य फल है जो केवल समर्पण और भाव से सिंचित जीवन रूपी वृक्ष पर लगता है। यह बात साध्वी सुमान्या भारती ने रविवार को कस्बा के दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में साप्ताहिक सत्संग के दौरान कही।
उन्होंने प्रेम की सुंदर परिभाषा देते हुए कहा कि प्रेम हृदय का सर्वश्रेष्ठ भाव है। साध्वी ने कहा कि आज स्वार्थ से परिपूर्ण मोह को ही प्रेम का नाम देकर हमें हमारे ही मन द्वारा ठगा जाता है और यह बात हम तब तक नहीं जान पाते, जब तक हम वास्तविक प्रेम का अनुभव प्राप्त न कर लें। नि:स्वार्थ भाव से किसी के प्रति पूर्ण समर्पण ही प्रेम कहलाता है।
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उन्होंने कहा कि यह नश्वर संसार सदैव चलायमान है परंतु इस नश्वर संसार में परमात्मा का आत्मा रूपी शाश्वत अंश हमारे भीतर विद्यमान है जिसका झुकाव सदा सर्वश्रेष्ठ की ओर रहता है। परंतु अविवेक के कारण हम नश्वरता में ही शाश्वत प्रेम को ढूंढने लगते हैं और यही हमारी सबसे बड़ी मूर्खता है।
परमात्मा के प्रति प्रकट हुआ दिव्य प्रेम ही नि:स्वार्थ प्रेम का आधार बनता है क्योंकि जब अंतर आत्मा में परमात्मा के लिए असीम प्रेम प्रकट हो जाता है तब हम ब्रह्मांड के कण कण से प्रेम करते हैं। ऐसी अवस्था में जीवन से राग द्वेष दोनों ही मिट जाते हैं, क्योंकि वो शुद्ध आत्मा अपने प्रभु प्रियतम को ही कण कण में देखती है और उसके प्रेम को प्रत्येक श्वास में अनुभव करती है।
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उन्होंने बताया कि जो महान आत्माओं ने अपने जीवन में परमात्मा के प्रेम को अनुभव किया, आज उनका नाम इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है परंतु जिन्होंने प्रेम जैसी दिव्य संपदा को इस नश्वर संसार का प्रेम पाने के लिए लुटा दिया, आज संसार में उन्हें कोई भी नहीं जानता।

व्यासपुर में सत्संग सुनते श्रद्धालु। प्रवक्ता

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