संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर/साढौरा। परिवार की आर्थिक स्थिति को ठीक करने का सपना लेकर डंकी रूट से अमेरिका पहुंचा अमन अब वापस आ गया है। छह माह के इस सफर ने अमन और उसके परिवार की जिंदगी को पूरी तरह से बदल दिया। छह माह पहले खुशी-खुशी अमन को विदा किया था। जब वह डिपोर्ट होकर घर पहुंचा तो परिजन भावुक हो गए। इस यात्रा में अमन ने 45 लाख रुपये खर्च किए, पनामा के जंगलों और समुद्र की लहरों का जोखिम भरा सफर तय किया। 20 दिन अमेरिका की जेल में भी बिताने पड़े।
अमन के चचेरे भाई अंकुश ने बताया कि अमन के पिता सुरेन्द्र की वर्ष 2012 में मृत्यु हो चुकी है। परिवार में विधवा मां के अलावा बड़ी बहन आशु देवी व भाई राहुल है। अमन ने 12 वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी करने के बाद विदेश जाकर काम करने की ठान ली थी। अमन की चाहत का पूरा करने के लिए जमीन बेचकर और रिश्तेदारों से 45 लाख रुपये खर्च कर उसे अमेरिका भेजा था।
मां ने बताया कि बेटे अमन को विदेश भेजने के लिए जमीन तक बेच दी है। यहां तक की रिश्तेदारों से भी रुपये उधार लिए थे। मां ने कहा कि उसके बेटे के संजोए गए सपने टूट गए है। अमन के परिजनों ने बताया कि वह 1 जुलाई 2024 को अमेरिका जाने के लिए घर निकला था। वह दिल्ली एयरपोर्ट से मुंबई पहुंचा था।
जहां से टूरिस्ट वीजा पर वह अफ्रीका के ढकार पहुंचा। वहां पर दो महीने रहने के बाद एजेंट ने ब्राजील से पनामा भेजा। इसके बाद यहां से पनामा के जंगलों और समुद्र का जोखिम भरा सफर तय करते हुए वह कोस्ट्रिया पहुंचा। वहां से निकारागोआ से होते हुए कोनड्रेस से गुवाटेमाल पहुंचा। 8 माह के जोखिम भरे रास्तों से गुजरने के बाद 25 जनवरी 2025 को मेक्सिको-अमेरिका की सीमा से अमेरिका पहुंचा था। जैसे ही वह अमेरिका पहुंचा तो उसे पकड़ लिया गया। 20 दिन तक जेल में रहा। रविवार की शाम को करीब शाम 5 बजे साढौरा थाना प्रभारी अमित कुमार अंबाला से थाना लेकर पहुंचे। वहां पर मौजूद उसका चचेरा भाई अंकुश उसे देखकर बिलख कर रोने लग गया। बयान दर्ज के बाद पुलिस ने अमन को स्वजनों के सुपुर्द कर दिया।