शिक्षा विभाग में कर्मचारी बताकर पांच लोगों ने रेलवे रोड पर डिंपल सिनेमा के पास एसबीआई बैंक से लाखों रुपये का पर्सनल लोन ले लिया। दो लोगों ने 12-12 लाख रुपये, एक ने दस लाख व दो लोगों ने नौ-नौ लाख रुपये के लोन लिए। लोन की राशि खाते में आते ही पांचों ने यह रकम निकाल ली। इसके बाद एक भी किस्त बैंक में जमा नहीं करवाई। जब बैंक में लोन की एक की किस्त वापस नहीं आई तो बैंक अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच की। जांच करने पर लोन लेने वालों के दस्तावेज फर्जी मिले। बैंक की ब्रांच मैनेजर सिमरित कौर ने इसकी शिकायत एसपी को दी। जांच के बाद ने संबंधित थाना पुलिस को मामले में केस दर्ज करने के आदेश दिए। जिसके बाद सेक्टर-17 थाना पुलिस ने मामले में पांच लोगों पर अलग-अलग धोखाधड़ी के केस दर्ज किए हैं।
पहले मामले में ब्रांच मैनेजर सिमरित कौर ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि कैथल के गांव मांझला निवासी रामपाल ने पर्सनल लोन के लिए बैंक में आवेदन किया था। उन्होंने कहा था कि वे शिक्षा विभाग में नौकरी करता है। तब उसने छछरौली के राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल की ओर से जारी पत्र दिया कि वे यहां तैनात है। वेतन की स्लीप और बैंक डिटेल भी दी गई थी। उसमें दिखाया था कि उसका सैनिक शिक्षा विभाग की ओर से वेतन आता है। जिस खाते की डिटेल दी गई थी, उसकी स्टेटमेंट दी गई, जिसके अनुसार सैनिक शिक्षा स्कूल से क्रेडिट होनी दिखाई गई थी। तब उसने यह भी कहा था कि वह डेपुटेशन पर सैनिक स्कूल में नियुक्त है। सभी दस्तावेजों की जांच करने के बाद तत्कालीन मैनेजर ने 11 अक्तूबर 2022 को उसका 12 लाख रुपये का पर्सनल लोन मंजूर कर दिया था। आरोपी ने वे पैसे अपने बचत खाते में ट्रांसफर कर लिए थे। लेकिन आरोपी ने लोन की किस्त नहीं दी। लोन की किस्त जमा न होने पर बैंक की टीम द्वारा जांच की गई। जांच के लिए बैंक कर्मी आरोपी के बताए स्कूल में गए। जहां पता चला कि वहां पर इस नाम का कोई टीचर नहीं है। वहां पर प्रिंसिपल को दस्तावेज दिखाए तो पता चला कि ये फर्जी हैं। इस शिकायत पर पुलिस ने मांझला निवासी रामपाल पर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है।
दूसरे मामले में ब्रांच मैनेजर ने शिकायत में बताया कि कैथल के वार्ड-18 निवासी नरेश कुमार ने खुद को जगाधरी राजकीय हाई स्कूल का टीचर बताया था। आवेदन के दौरान उसने स्कूल के प्रिंसिपल की ओर से जारी पत्र दिया कि वे यहां तैनात है। आरोपी ने अपनी सर्विस बुक की कापी भी बैंक में दी थी। जिसमें वेतन सैनिक शिक्षा विभाग से आना दर्शाया गया। बैंक की ओर से उसका भी 12 लाख रुपये का पर्सनल लोन मंजूर किया था। लोन के बाद आरोपी के खाते में पैसे डाल दिए गए थे। लेकिन आरोपी ने किस्त नहीं भरी। जब किस्त नहीं भरी तो बैंक की टीम ने स्कूल में जाकर पता किया तो पता चला कि आरोपी द्वारा फर्जी दस्तावेज जमा करवाकर लोन लिया। आरोपी पर केस दर्ज कर लिया है।
तीसरे मामले में बैंक मैनेजर की शिकायत पर कैथल की डिफेंस कॉलोनी निवासी उर्मिला पर केस दर्ज किया गया है। उसने खुद को अंबाला के राजकीय हाई स्कूल में टीचर बताया था। आवेदन पर उसने भी वहां के प्रिंसिपल की ओर से जारी पत्र दिया कि वे यहां तैनात है। सैनिक शिक्षा विभाग से वेतन आने की अप्रैल 2022 से सितंबर 2022 की स्लीप बैंक में दी थी। उसने भी सैनिक स्कूल में डेपुटेशन पर तैनात होने की बात बैंक में बताई थी और नौ लाख रुपये का लोन ले लिया था। लोन की रकम वापस न करने पर जांच की तो लोन लेते समय दिए गए दस्तावेज फर्जी निकले। मामले में सेक्टर 17 थाना पुलिस ने कार्रवाई की।
बैंक मैनेजर सिमरित कौर ने बताया कि नरवाना के गांव अंबरसर निवासी दीपक ने खुद को दामला राजकीय हाई स्कूल का टीचर बताकर बैंक से 10 लाख का लोन लिया था। आवेदन के दौरान उसने प्रिंसिपल का पत्र दिया। जिसमें कहा गया था कि वह सैनिक शिक्षा विभाग में इन दिनों डेपुटेशन पर है। उसने अप्रैल से अक्तूबर 2022 की वेतन की स्लीप भी बैंक में दिखाई थी। जिस पर बैंक ने विश्वास कर नवंबर 2022 में उसका 10 लाख रुपये का पर्सनल लोन पास कर दिया था और उसके खाते में लोन की राशि जमा कर दी थी। लोन की रकम वापस न करने पर जब जांच की गई तो उसके दस्तावेज भी फर्जी मिले।
पांचवें मामले में मैनेजर की ओर से पुलिस को दी शिकायत में बताया गया कि हिसार के राजौंद निवासी प्रियंका ने खुद लाड़वा के राजकीय हाई स्कूल की टीचर बताया। मई से अक्तूबर 2022 तक की वेतन की स्लीप बैंक में दी थी। वहीं अपना पता दामला बताया था। उसने भी सैनिक स्कूल में डेपुटेशन पर होने की बात बताते हुए बैंक में लोन के लिए आवेदन किया था। बैंक की ओर से दिसंबर 2022 को उनका नौ लाख रुपये का लोन मंजूर कर दिया था। पैसे खाते में आते ही उसने उन्हें निकाल लिया। लेकिन उसने किस्त जमा नहीं कराई। जांच करने पर उसके दस्तावेज भी फर्जी निकले। जिसके बाद पुलिस ने केस दर्ज किया।