संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। 45 जोन के शराब के ठेकों की नीलामी सोमवार को एक बार फिर नहीं हो सकी। नीलामी में हिस्सा लेने के लिए कोई ठेकेदार सामने नहीं आया। ठेकेदारों को आकर्षित करने के लिए विभाग ने ठेकों के लिए आरक्षित मूल्यों में करीब 11 करोड़ रुपये की कटौती की थी, लेकिन इसका भी कोई लाभ नहीं दिखाई दिया। इससे पहले पांच बार हुई नीलामी में भी किसी ठेकेदार ने दिलचस्पी नहीं दिखाई।
ठेकेदारों के नीलामी में भाग न लेने के पीछ सुरक्षा बड़ा कारण बताई जा रही है। जिले में शराब के कुल 55 जोन में से अभी तक केवल 10 जोन के ठेके ही बिक पाए हैं। 45 जोन के 90 ठेकों की नीलामी की जानी है। इन ठेेकों की नीलामी से सरकार के खजाने में करीब 400 करोड़ रुपये आने हैं। यहां 31 मई को शराब ठेकों के सभी 55 जोन की पहली बार नीलामी कराई गई। 55 जोन के लिए रिजर्व प्राइस 484.77 करोड़ रुपये रखा गया था।
पहली बार में केवल 27 करोड़ रुपये में तीन जोन ही बिक सके। कम जोन की नीलामी होने से इन तीनों जोन की नीलामी को भी रद्द कर दिया गया। 4 जून को हुई दूसरी नीलामी में 10 जोन के ठेके बिक गए। इसके बाद हुई सभी नीलामियों से ठेकेदारों ने दूरी बना ली। 27 मई को शराब के ठेके पर हुई फायरिंग का खौफ दूर करने के लिए मुख्यमंत्री से लेकर वरिष्ठ पुलिस अफसरों ने ठेकेदारों को सुरक्षा के आश्वासन दिए परंतु इसका कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला।
हाल ही में कुरुक्षेत्र के शाहबाद व जींद में जिस तरह से गोली मार कर दो शराब ठेकेदारों को मौत के घाट उतार दिया गया उसका असर यहां भी नजर आ रहा है। स्थानीय शराब कारोबारियों में दहशत का माहौल है। यह खौफ इस कदर हावी है कि मुख्यमंत्री नायब सैनी से चंडीगढ़ में हुई बातचीत के बाद से किसी भी ठेकेदार ने किसी के साथ बैठक नहीं की है।